'खून से सने हाथ... अब तक 40 लोगों की मौत', बंगाल में वोटर लिस्ट की SIR जांच पर TMC-EC के बीच टकराव तेज

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और ममता सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है. सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने आरोप लगाए हैं कि इस प्रक्रिया की वजह से प्रदेश में अब तक 40 लोगों की जान चली गई है.

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वोटर लिस्ट संशोधन पर TMC-EC मीटिंग में भारी हंगामा (Photo: PTI) वोटर लिस्ट संशोधन पर TMC-EC मीटिंग में भारी हंगामा (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:45 AM IST

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर टकराव चरम पर पहुंच गया है. TMC और चुनाव आयोग के बीच हुई बैठक में माहौल इतना गरम हो गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए.

TMC प्रतिनिधिमंडल ने मीटिंग में शुरुआत ही इस आरोप से की कि SIR की वजह से 40 लोगों की जान गई. डेरेक ओ'ब्रायन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे कहा, “आपके हाथ खून से सने हैं.” पार्टी का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया लोगों और बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) पर भारी दबाव डाल रही है, जिससे कई मौतें हुईं. TMC ने अपनी तरफ से 40 मृतकों की एक लिस्ट भी आयोग को सौंपी.

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EC का जवाब - आरोप झूठे, प्रक्रिया पारदर्शी

चुनाव आयोग ने TMC के सभी दावों को “बेसिर-पैर का” करार दिया. EC ने साफ कहा कि SIR 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समान रूप से चल रही है और बंगाल को निशाना बनाने का आरोप निराधार है. 

आयोग का कहना है कि बीएलओ को डराना-धमकाना बंद होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल को उनके काम में दखल नहीं देना चाहिए.

TMC की मांग -  पूरी मीटिंग की CCTV फुटेज जारी हो

TMC ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग चुनिंदा जानकारियां लीक कर रहा है. पार्टी ने मांग की कि पूरी मीटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग और डॉयक्युमेंट्स पब्लिक किए जाएं ताकि सच सामने आ सके. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर EC के पास कुछ छिपाने को नहीं है, तो मीटिंग लाइव दिखाने में दिक्कत क्यों है?

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यह भी पढ़ें: SIR: ममता ने मतुआ समुदाय को बनाया हथियार, क्या घुसपैठ के मुद्दे को कर पाएंगी काउंटर?

क्यों बढ़ा विवाद?

TMC का सवाल है कि अगर लक्ष्य “घुसपैठियों” को हटाना है, तो SIR सिर्फ कुछ राज्यों में ही क्यों? उत्तर-पूर्वी सीमा वाले संवेदनशील राज्यों में ऐसा अभियान क्यों नहीं चला? पार्टी ने यह भी कहा कि BJP के कुछ नेता दावा कर रहे हैं कि एक करोड़ वोटर हटाए जाएंगे. EC ने इस बयान पर कोई सफाई नहीं दी.

EC की आधिकारिक स्थिति

आयोग का कहना है कि मसौदा वोटर लिस्ट 9 दिसंबर के बाद जारी होगी, तब सभी दल अपनी आपत्तियां दे सकते हैं. EC ने TMC को सलाह दी कि वे बीएलओ या अधिकारियों पर दबाव न डालें, क्योंकि SIR अभी प्रक्रिया में है.

कौन मिला EC से?

TMC की 10 सदस्यीय टीम - जिनमें डेरेक, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और अन्य नेता शामिल थे - ने यह मुद्दे उठाए और कहा कि SIR के कारण जनता में डर फैल रहा है और आयोग इससे निपट नहीं पा रहा.

पूरे मामले ने बंगाल की राजनीति को गर्मा दिया है - एक तरफ EC अपनी निष्पक्षता पर ज़ोर दे रहा है, तो दूसरी तरफ TMC लगातार इसे “मौतों वाला अभियान” बता रही है.

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