नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में गठित SIT ने अपनी जांच पूरी कर ली है. शुक्रवार की देर रात तक नोएडा अथॉरिटी के दफ्तर में बैठकर अधिकारियों, कर्मचारियों और रेस्क्यू में शामिल जवानों से गहन पूछताछ की गई. SIT की टीम ने एक दिन पहले घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण भी किया था. वहां जाकर हालात को समझने के बाद टीम सीधे नोएडा अथॉरिटी पहुंची थी. जिम्मेदार अफसरों से जवाब तलब किए गए.
जानकारी के मुताबिक, SIT की टीम शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे नोएडा अथॉरिटी के कार्यालय पहुंची थी और देर रात तक वहीं मौजूद रही. इस दौरान नोएडा अथॉरिटी के CFO, ACP, SHO, CMO के साथ-साथ SDRF के जवान और संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. सभी अधिकारी अपने-अपने जवाबों और दस्तावेजों की फाइल लेकर SIT के सामने पेश हुए.
जांच के दौरान यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर क्यों करीब 90 मिनट तक मदद के लिए गुहार लगाने के बावजूद इंजीनियर युवराज को बचाया नहीं जा सका. रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए उपकरणों, संसाधनों की उपलब्धता और जवानों के समय पर पानी में न उतरने जैसे मुद्दों पर भी गहन पूछताछ हुई.
SIT की टीम ने यह भी जानने का प्रयास किया कि क्या रेस्क्यू के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई और यदि हां, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है. सूत्र बताते हैं कि टीम ने फैक्ट फाइंडिंग के दौरान लगभग सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को समझ लिया है. माना जा रहा है कि SIT ने जांच के दौरान सभी उपलब्ध तथ्यों, दस्तावेजों और बयानों को शामिल कर लिया है.
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सूत्रों के मुताबिक, SIT ने रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों के बयान दर्ज किए हैं. उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया कि मौके पर मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और किस स्तर पर निर्णय लेने में देरी हुई. इसके अलावा यह भी जांच का हिस्सा रहा कि मौके पर मौजूद अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय की कमी तो नहीं थी.
सूत्रों का कहना है कि SIT ने फैक्ट फाइंडिंग के दौरान यह जाना कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. अब जांच रिपोर्ट को मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की तैयारी है. रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है. माना जा रहा है कि लापरवाही सामने आती है तो नोएडा अथॉरिटी के संबंधित विभागों के कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है.
भूपेन्द्र चौधरी