झूठ की पोल खोलने वाला ये Video ... कानपुर लैंबॉर्गिनी केस में वकील, पिता और ड्राइवर सब बेनकाब

कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे में एक नया वीडियो सामने आया है, जो अब तक दिए गए बयानों पर सवाल खड़े कर रहा है. वीडियो में हादसे के तुरंत बाद का दृश्य दिख रहा है, जिसमें ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा नजर आ रहा है और गाड़ी में किसी ड्राइवर की मौजूदगी नहीं दिखती. दूसरी ओर, शिवम के पिता केके मिश्रा और वकील लगातार दावा कर रहे हैं कि गाड़ी ड्राइवर मोहन चला रहा था. सच क्या है अब इसकी पोल खुल रही है. 

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कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे का नया वीडियो सामने आया है, जिसने सारी पोल खोल दी (PTI Photo) कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे का नया वीडियो सामने आया है, जिसने सारी पोल खोल दी (PTI Photo)

सिमर चावला

  • कानपुर ,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:07 PM IST

कानपुर का हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी केस एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार वजह है एक वीडियो, जो हादसे के तुरंत बाद का बताया जा रहा है. वीडियो सामने आते ही अब तक दिए गए दावों और सफाइयों पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है. अब तक कहानी दो हिस्सों में बंटी हुई थी एक तरफ पुलिस का दावा कि हादसे के वक्त लैंबॉर्गिनी खुद शिवम मिश्रा चला रहे थे. दूसरी तरफ शिवम के पिता और वकील का कहना कि गाड़ी ड्राइवर मोहन के हाथ में थी. लेकिन नए वीडियो ने सब साफ कर दिया है कि कौन झूठ बोल रहा है और कौन सच. 

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वीडियो में क्या दिख रहा है?

घटना के तुरंत बाद का बताया जा रहा यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है. फुटेज में कथित तौर पर साफ दिख रहा है कि गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर शिवम मिश्रा बैठे हैं. वीडियो में किसी अन्य व्यक्ति को ड्राइवर सीट पर उतरते या निकलते हुए नहीं देखा जा रहा. इसके अलावा, मौके पर मौजूद बाउंसर वॉकी-टॉकी हाथ में लिए बातचीत करते नजर आते हैं. वे भीड़ को दूर हटने के लिए कहते दिख रहे हैं. घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल साफ झलकता है. यही वीडियो अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है अगर ड्राइवर मोहन गाड़ी चला रहा था, तो वह फुटेज में क्यों नजर नहीं आ रहा ?

पिता का दावा: ड्राइवर चला रहा था

इस पूरे मामले में शिवम के पिता और शहर के चर्चित व्यापारी केके मिश्रा खुलकर सामने आए हैं. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके बेटे को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे भ्रामक हैं. केके मिश्रा के अनुसार, हादसे से एक दिन पहले लैंबॉर्गिनी में तकनीकी खराबी आ गई थी. मैकेनिक बुलाकर गाड़ी ठीक कराई गई थी और अगले दिन टेस्टिंग के लिए उसे निकाला गया. उनका कहना है कि शिवम अपने ड्राइवर मोहन के साथ गाड़ी में थे और ड्राइविंग सीट पर मोहन ही था. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी इसके उलट बोल रहा है, वह गलत जानकारी दे रहा है चाहे वह पुलिस हो या पुलिस कमिश्नर. ड्राइवर मोहन का कोर्ट में दिया गया एफिडेविट, जिसमें उसने दावा किया कि हादसे के समय गाड़ी वही चला रहा था. 

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झपकी और मेडिकल इमरजेंसी की कहानी

केके मिश्रा ने जो घटनाक्रम बताया, वह पूरी तरह अलग तस्वीर पेश करता है. उनके मुताबिक, टेस्टिंग के बाद जब गाड़ी लौट रही थी, तभी शिवम को अचानक झपकी आने लगी. ड्राइवर ने यह महसूस किया और उन्हें संभालने की कोशिश की. इसी दौरान स्टीयरिंग पर नियंत्रण कम हुआ और बगल से गुजर रहे एक ऑटो से हल्की टक्कर हो गई. उनका कहना है कि टक्कर के बाद गाड़ी का दरवाजा लॉक हो गया. पीछे चल रही सिक्योरिटी टीम ने स्थिति को गंभीर समझते हुए शीशा तोड़ा और शिवम को बाहर निकाला. परिवार का दावा है कि यह कोई भागने की कोशिश नहीं थी, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी थी.

केके मिश्रा के अनुसार, शिवम को तुरंत घर लाया गया और डॉक्टर से संपर्क किया गया. डॉक्टर की सलाह पर दवाएं दी गईं और बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि अभी जांच चल रही है ब्लड प्रेशर, ब्रेन से जुड़ी जांच और सीटी स्कैन कराया जा रहा है. बिना मेडिकल रिपोर्ट के नशे जैसी अटकलें लगाना गैर-जिम्मेदाराना है. 

पुलिस ने साफ कहा, हमें पता है क्या हुआ था 

मामले में पुलिस कमिश्नर का बयान भी सामने आ चुका है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार गाड़ी शिवम मिश्रा चला रहे थे. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती एफआईआर में शिवम का नाम नहीं था. बाद में जब मामला चर्चा में आया और सवाल उठे, तब उनका नाम जोड़ा गया.

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