वाराणसी के दाल मंडी इलाके में मणिकर्णिका घाट के पास सड़क चौड़ीकरण के काम के दौरान मंदिरों और मूर्तियों को तोड़े जाने के आरोपों पर बढ़ते विवाद के बीच, समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विरासत की इमारतों को संरक्षित किया जाना चाहिए, न कि नष्ट किया जाना चाहिए.
'धरोहरें तोड़ी नहीं संजोयी जाती हैं'
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिंदी में एक पोस्ट में अखिलेश ने लिखा, 'मोतियों की तरह पिरोयी जाती हैं. धरोहरें तोड़ी नहीं संजोयी जाती हैं.' पूर्व मुख्यमंत्री ने पोस्ट के साथ तस्वीरें भी शेयर कीं, जिनमें कथित तौर पर पुनर्विकास कार्य से पहले और बाद की मूर्तियां दिखाई गई हैं. एक तस्वीर पर उन्होंने लिखा, 'मलबे में दबी मिलीं अहिल्याबाई की प्रतिमा.'
अखिलेश ने लगाया था ये आरोप
यादव की यह टिप्पणी दाल मंडी पुनर्विकास परियोजना को लेकर बीजेपी पर राजनीतिक हमला करने के कुछ दिनों बाद आई है. शुक्रवार को सपा प्रमुख ने सत्ताधारी पार्टी पर इलाके के छोटे व्यापारियों और निवासियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था.
सपा प्रमुख ने कहा था, 'बीजेपी अपने चहेतों और सहयोगियों को फायदा पहुंचाने की धुन में काशी की दाल मंडी में हर दुकानदार और घर को कुचल रही है. लोग अब इस उत्पीड़न और अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे,' उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी 'धोखे का दूसरा नाम बन गई है.'
सरकार ने क्या कहा?
इस विवाद के बाद UP सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से तीखी हमला हुआ. सरकार ने इन आरोपों को झूठा और गुमराह करने वाला बताया है. अधिकारियों ने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, गलत सूचना फैलाने और सार्वजनिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दाल मंडी पुनर्विकास के दौरान मूर्तियों को तोड़े जाने या मंदिरों को गिराए जाने के दावों का साफ तौर पर खंडन किया है. शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर वाराणसी में कथित मंदिर विध्वंस को लेकर 'झूठा प्रचार' फैलाने का आरोप लगाया.
क्या बोले CM योगी आदित्यनाथ?
CM योगी ने दावा किया कि मूर्ति बनाने वाली कार्यशालाओं से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेषों की चुनिंदा तस्वीरें ली जा रही हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है, ताकि उन्हें झूठे तौर पर गिराए गए मंदिर की मूर्तियों के रूप में दिखाया जा सके. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि AI-जनरेटेड छवियों का इस्तेमाल जनता को गुमराह करने और चल रहे विकास कार्यों को पटरी से उतारने के लिए किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा था, 'सभी जानते हैं कि मणिकर्णिका घाट पर मंदिर ठीक वहीं हैं जहां वे थे.'
क्या है मामला?
यह विवाद वाराणसी प्रशासन की 650 मीटर लंबी दाल मंडी सड़क को उसकी मूल चौड़ाई लगभग 3.5 मीटर से बढ़ाकर लगभग 17.5 मीटर (लगभग 60 फीट) करने की महत्वाकांक्षी योजना के इर्द-गिर्द केंद्रित है. इस प्रोजेक्ट का मकसद भीड़ कम करना और काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर 4 तक पहुंच को बेहतर बनाना है.
रीडेवलपमेंट के हिस्से के तौर पर इस रास्ते पर कई दुकानों और इमारतों को गिराने के लिए चुना गया है, जिससे हेरिटेज कंजर्वेशन, व्यापारियों के विस्थापन और धार्मिक ढांचों पर कथित असर को लेकर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है.
अखिलेश का पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप
अखिलेश ने एक और X पोस्ट में पाल समाज के प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, 'वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पाल समाज के प्रदर्शन पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज और एक दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया. अब भाजपाई कहेंगे ये समाचार भी ‘एआई’ से बना है. अरे कोई इन्हें समझाए, भाई सब कुछ नहीं होता एआई. भाजपाइयों से जनता पूछ रही है कि जब सब कुछ एआई से ही हो रहा है तो आप क्या कर रहे हैं? भाजपाइयों ने कमीशन लेकर कहीं सरकार को ही एआई को आउट सोर्स तो नहीं कर दिया?
गौरतलब है कि अखिलेश यादव लगातार सवाल उठा रहे हैं. जबकि पुलिस ने फेक फोटो, वीडियो शेयर करने के आरोप में आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
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