दो पत्नी और 5 बच्चे… तीन बहनों के सुसाइड केस में रिश्तों का पूरा सच जानने में जुटी पुलिस 

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों के सुसाइड केस में नया एंगल सामने आया है. बच्चियों के पिता ने दो शादियां की है. पहली पत्नी से बच्चे नहीं हुए थे दूसरी शादी साली से की. पांच बच्चों, दोनों पत्नियों का एक साथ रहना और तीनों बहनों का दो साल से स्कूल न जाना जांच का अहम हिस्सा बन गया है. पुलिस को कोरियन कल्चर, 50 टास्क और आखिरी टास्क से जुड़े सुराग मिले हैं, जिनकी गहन जांच जारी है.

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गाजियाबाद में तीन बहनों ने एक साथ सुसाइड कर लिया (Photo ITG) गाजियाबाद में तीन बहनों ने एक साथ सुसाइड कर लिया (Photo ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • गाजियाबाद ,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

कोरियन लवर गेम के चक्कर में गाजियाबाद तीन बहनों के सुसाइड केस की पड़ताल में पुलिस हर एंगल पर जांच कर रही है. पता चला है कि तीनों बहनों के पिता ने दो शादियां की थीं. पहली शादी के कई साल बाद तक संतान नहीं हुई. इसके बाद उसने पहली पत्नी की छोटी बहन यानी साली से दूसरी शादी कर ली गई. 

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दूसरी शादी से तीन बच्चे हुए, लेकिन किस्मत ने यहां एक मोड़ लिया. इसी दौरान पहली पत्नी से भी दो बच्चे हो गए. इस तरह एक ही घर में दो पत्नियां, पांच बच्चे और एक जटिल पारिवारिक ढांचा खड़ा हो गया. बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता था. दोनों पत्नियां, सभी बच्चे सब साथ रहते थे. लेकिन इसी घर में पनप रही थी एक ऐसी खामोशी, जिसका अंदाजा किसी को नहीं था. जिन तीन बहनों ने अपनी जान दी, उनमें दो दूसरी पत्नी की बेटियां थीं, जबकि एक पहली पत्नी की बेटी थी. तीनों की उम्र कम थी, लेकिन उनके बीच का जुड़ाव असामान्य रूप से गहरा था. तीनों बहनें पिछले दो सालों से स्कूल नहीं जा रही थीं. बताया गया कि वे पढ़ाई में कमजोर थीं, इसलिए घर पर ही रखी गईं. स्कूल से दूरी, बाहरी दुनिया से कटाव. इन सबने धीरे-धीरे उनकी दुनिया को चार दीवारों और एक मोबाइल स्क्रीन तक सीमित कर दिया.

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पिता ने कैमरे पर नहीं दिया बयान 

घटना के बाद जब पुलिस और मीडिया घर पहुंची, तो बच्चियों के पिता कैमरे से नजरें चुराते दिखे. उन्होंने अपना चेहरा दिखाने से इनकार कर दिया. आजतक से बातचीत में उन्होंने बस इतना कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटियां किस रास्ते पर चल पड़ी हैं. उन्हें सिर्फ इतना मालूम था कि वे कोरियन गेम और कोरियन कंटेंट देखती थीं. कल आखिरी टास्क था. ये बात मुझे भी अब पता चली है.

50 टॉस्क थे इस गेम में 

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियां किसी टास्क आधारित गेम या गतिविधि से जुड़ी हो सकती हैं. आशंका है कि इसमें कुल 50 टास्क थे और जिस दिन यह घटना हुई, वही आखिरी टास्क का दिन था. पुलिस अभी यह तय नहीं कर पा रही है कि यह कोई संगठित ऑनलाइन गेम था या फिर सोशल मीडिया और वीडियो कंटेंट के जरिए बना हुआ एक मानसिक दबाव, जिसने बच्चियों को धीरे-धीरे इस हद तक पहुंचा दिया.

बीच वाली बहन थी लीडर 

पुलिस को शक है कि तीनों बहनों में से बीच वाली बच्ची इस पूरे सिलसिले की लीडर थी. वही तय करती थी कि क्या करना है, कब करना है और कैसे करना है. बाकी दोनों बहनें उसी के निर्देशों पर चलती थीं. तीनों हर काम साथ करती थीं उठना, बैठना, खाना, समय बिताना. जांचकर्ताओं को आशंका है कि यह सामूहिकता भी किसी टास्क का हिस्सा थी, जिससे अलग होने की सोच धीरे-धीरे खत्म हो जाती है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चियों ने अपने व्यवहार से किसी को जरा भी शक नहीं होने दिया. घर में दो मांएं थीं, कई भाई-बहन थे, फिर भी किसी को यह अहसास नहीं हुआ कि तीनों बच्चियां भीतर ही भीतर किसी गहरे दबाव में हैं. पड़ोसियों का कहना है कि बच्चियां शांत रहती थीं, ज्यादा बाहर नहीं निकलती थीं, लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि कुछ गलत होने वाला है.

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घटना के बाद पुलिस ने बच्चों के सभी मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं. डिजिटल फोरेंसिक टीम हर पहलू की जांच कर रही है. कॉल रिकॉर्ड, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, वीडियो, नोट्स और इंस्टॉल किए गए ऐप्स. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चियां किस तरह के कंटेंट से जुड़ी थीं और क्या किसी बाहरी व्यक्ति या ग्रुप का उन पर प्रभाव था. डीसीपी निमिष पाटिल खुद मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया, जहां यह सब हुआ. उन्होंने परिवार के सदस्यों से लंबी बातचीत की. डीसीपी के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चियां कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं. हालांकि अभी तक किसी खास गेम या टास्क का ठोस सबूत नहीं मिला है. जांच जारी है. डीसीपी ने कहा, जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

सुसााइड नोट भी मिला 

पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है. इसमें किसी व्यक्ति या प्लेटफॉर्म का सीधा नाम नहीं है, लेकिन कोरियन कल्चर का जिक्र जरूर है. जांचकर्ता इस नोट को बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने की अहम कड़ी मान रहे हैं. परिवार के भीतर की स्थिति भी जांच के दायरे में है. दो पत्नियां, अलग-अलग मांओं से पैदा हुए बच्चे और एक ही छत के नीचे पलता हुआ यह पूरा परिवार. क्या यह ढांचा बच्चों के मन पर किसी तरह का दबाव बना रहा था? पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है. हालांकि अभी तक घरेलू विवाद या हिंसा का कोई सीधा संकेत नहीं मिला है. परिवार ने कुछ दिन पहले बच्चियों के मोबाइल इस्तेमाल पर पाबंदी भी लगाई थी. अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह पाबंदी क्यों लगाई गई थी. क्या परिवार को किसी संदिग्ध गतिविधि की भनक लगी थी? या फिर यह प्रतिबंध बच्चियों के लिए और ज्यादा मानसिक दबाव का कारण बन गया ?

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