यूपी में संपत्ति खरीदने के लिए अब पैन जरूरी, विदेशी फंडिंग से संपत्तियां खरीदने पर रोक की कवायद, क्या है इसका मतलब

उत्तर प्रदेश सरकार ने अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री में पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है. यह फैसला इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे जिलों में विदेशी फंडिंग और बेनामी संपत्तियों पर रोक के लिए लिया गया है. अब पूरे प्रदेश में संपत्ति खरीदने या बेचने पर क्रेता और विक्रेता दोनों को पैन कार्ड देना होगा. ऑनलाइन रजिस्ट्री सिस्टम में भी बदलाव किया गया है.

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यूपी में संपत्ति खरीदने-बेचने पर सख्ती. (Photo: Representational) यूपी में संपत्ति खरीदने-बेचने पर सख्ती. (Photo: Representational)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:29 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब प्रदेश के किसी भी जिले में संपत्ति खरीदने या बेचने के लिए क्रेता और विक्रेता दोनों को पैन कार्ड देना अनिवार्य होगा. यह नियम खास तौर पर इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे इलाकों में विदेशी फंडिंग, बेनामी संपत्ति और संदिग्ध लेनदेन पर रोक लगाने के मकसद से लागू किया गया है.

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सरकार ने इस संबंध में सभी जिलों के अधिकारियों को साफ निर्देश जारी कर दिए हैं. अब रजिस्ट्री के समय पैन कार्ड के बिना कोई भी सौदा पूरा नहीं होगा. चाहे जमीन हो, मकान हो या कोई दूसरी अचल संपत्ति हर तरह के अनुबंध में पैन कार्ड की जानकारी देना जरूरी होगा.

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इंडो-नेपाल बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों से बढ़ी चिंता

पिछले कुछ वर्षों में इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे जिलों में विदेशी फंडिंग के जरिए संपत्तियां खरीदे जाने की कई शिकायतें सामने आई हैं. सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह आशंका भी जताई गई कि इन फंड्स का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों और टेरर फंडिंग में किया जा सकता है. इसी को देखते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया.

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सरकार का मानना है कि संपत्ति खरीद में पारदर्शिता लाने से न सिर्फ अवैध लेनदेन पर रोक लगेगी, बल्कि उन लोगों की पहचान भी हो सकेगी जो विदेशी पैसों के जरिए संपत्ति जमा कर रहे हैं.

एटीएस जांच से खुला विदेशी फंडिंग का मामला

बीते साल यूपी एटीएस की एक जांच में संत कबीर नगर के रहने वाले मौलाना शमशुल हुदा खान का मामला सामने आया. जांच में पता चला कि वह कई सालों से लंदन में रह रहा था और ब्रिटेन की नागरिकता लेने के बावजूद 2007 से 2017 तक आजमगढ़ के एक मदरसे से तनख्वाह लेता रहा.

एटीएस की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मौलाना ने लंदन में रहते हुए पाकिस्तान की कई यात्राएं कीं और संदिग्ध संगठनों की बैठकों में हिस्सा लिया. आशंका जताई गई कि उसके आतंकी संगठनों से संपर्क हो सकते हैं.

ईडी की कार्रवाई और संपत्तियों का खुलासा

एटीएस की जांच के बाद आजमगढ़ और इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे श्रावस्ती जिले में मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. मामला विदेशी फंडिंग से जुड़ा होने के कारण ईडी ने भी जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि मौलाना के अलग-अलग खातों में करीब चार करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग आई थी.

इसी रकम से संत कबीर नगर के खलीलाबाद में मदरसा खोला गया और परिजनों के नाम पर कई संपत्तियां खरीदी गईं. ईडी ने मौलाना से जुड़े 18 खातों में जमा 94 लाख 27 हजार रुपये जब्त कर लिए और संपत्तियों को अटैच कर दिया.

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पूरे प्रदेश में लागू होगा नया नियम

इन घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला लिया कि अब इंडो-नेपाल बॉर्डर के सात जिलों, जिनमें गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में पैन कार्ड अनिवार्य किया जाएगा.

ऑनलाइन रजिस्ट्री सिस्टम में भी बदलाव किया गया है, ताकि पैन कार्ड की जानकारी डाले बिना रजिस्ट्री आगे न बढ़ सके. इससे हर सौदे का डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा.

बेनामी संपत्ति और अवैध फंडिंग पर लगेगी लगाम

सरकार को उम्मीद है कि इस नियम से बेनामी संपत्तियों की खरीद पर रोक लगेगी और अवैध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा. पैन कार्ड अनिवार्य होने से इनकम टैक्स विभाग भी यह देख सकेगा कि कोई व्यक्ति अचानक बड़ी मात्रा में संपत्ति तो नहीं खरीद रहा और उसकी आय का स्रोत क्या है.

साथ ही एटीएस, ईडी और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों के लिए विदेशी फंडिंग के कनेक्शन खंगालना भी आसान हो जाएगा. सरकार का मानना है कि यह कदम इंडो-नेपाल बॉर्डर के इलाकों में देश विरोधी ताकतों की गतिविधियों पर लगाम लगाने में अहम साबित होगा.

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