कानपुर में 4018 नंबर वाली लैंबॉर्गिनी कार से जुड़े हादसे के बाद उठा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में जहां एक ओर जहां पुलिस की कार्रवाई घेरे में हैं, वहीं दूसरी ओर अब शिवम मिश्रा के पिता और जाने-माने व्यापारी केके मिश्रा खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि उनके बेटे को लेकर जो भी बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.
केके मिश्रा ने आजतक से बातचीत में कहा, मैं पूरी घटना बताने को तैयार हूं. पुलिस मुझे परेशान कर रही है. इस मामले में जो दिखाया जा रहा है सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. केके मिश्रा के मुताबिक, जिस लैंबॉर्गिनी कार को लेकर इतना बवाल मचा है, उसमें हादसे से एक दिन पहले ही तकनीकी खराबी आ गई थी. उन्होंने बताया कि गाड़ी में कुछ समस्या थी, जिस कारण मैकेनिक को बुलाकर उसकी मरम्मत कराई गई थी. मैकेनिक ने गाड़ी ठीक की थी. इसके बाद यह तय हुआ कि अगले दिन गाड़ी को टेस्टिंग के लिए निकाला जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि कोई दिक्कत बाकी तो नहीं है. यही वजह थी कि अगले दिन शिवम मिश्रा अपने ड्राइवर मोहन के साथ गाड़ी लेकर निकले.
ड्राइविंग सीट पर कौन था?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद इसी बात को लेकर है कि गाड़ी कौन चला रहा था. शुरू में FIR में शिवम का नाम नहीं था, बाद में हंगामा हुआ शिवम का नाम भी जोड़ा गया. पुलिस कमिश्नर ने खुद आजतक से कहा कि लैंबॉर्गिनी शिवम मिश्रा खुद चला रहे थे. इस पर भी केके मिश्रा ने कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा, शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था. ड्राइवर मोहन गाड़ी चला रहा था. जो भी इसके उलट बोल रहा है, चाहे वह पुलिस हो या पुलिस कमिश्नर, वह गलत बोल रहा है. उनके अनुसार, शिवम सिर्फ साथ में बैठे थे और गाड़ी की टेस्टिंग के दौरान सब कुछ सामान्य चल रहा था.
झपकी, ब्रेक और टक्कर की कहानी
केके मिश्रा ने जो घटनाक्रम बताया, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता, लेकिन वे इसे पूरी तरह सच्चा बताते हैं. उन्होंने कहा कि सिविल लाइन्स तक टेस्टिंग के बाद जब गाड़ी वापस लौट रही थी, उसी दौरान शिवम को अचानक झपकी आने लगी. ड्राइवर ने यह महसूस किया कि शिवम की हालत ठीक नहीं लग रही. ड्राइवर ने एक हाथ स्टीयरिंग से हटाकर शिवम को संभालने की कोशिश की. इसी वजह से गाड़ी की स्पीड कम हो गई. इसी दौरान बगल से आ रहे एक ऑटो से हल्की टक्कर हो गई और गाड़ी रुक गई.
लॉक हो गई कार, टूटा शीशा
केके मिश्रा के मुताबिक, टक्कर के बाद लैंबॉर्गिनी का दरवाजा लॉक हो गया. दरवाजा और शीशा नहीं खुल रहा था. पीछे से आ रही हमारी सिक्योरिटी ने देखा कि शिवम सीट पर झुक गए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिक्योरिटी स्टाफ ने शीशा तोड़ा और शिवम को बाहर निकाला. यह कोई भागने या बचने की कोशिश नहीं थी. यह एक मेडिकल इमरजेंसी थी.
घर से डॉक्टर तक की दौड़
शिवम को बाहर निकालने के बाद परिवार ने उन्हें सीधे घर पहुंचाया. केके मिश्रा ने बताया कि उन्होंने तुरंत अपने डॉक्टर को फोन किया. मैंने डॉक्टर से कहा कि शिवम को होश नहीं आ रहा है. डॉक्टर ने कुछ दवाइयां बताईं. कुछ देर बाद शिवम को होश आया, जिसके बाद उन्हें दूसरी गाड़ी से डॉक्टर के पास भेजा गया. फिलहाल उनका इलाज जारी है.
BP या ब्रेन से जुड़ी समस्या?
केके मिश्रा के अनुसार, शिवम को झपकी आने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. डॉक्टर कई एंगल से जांच कर रहे हैं. BP भी कारण हो सकता है. ब्रेन की जांच कराई जा रही है. CT स्कैन हो रहा है. अभी कुछ भी फाइनल कहना गलत होगा. उन्होंने कहा कि बिना मेडिकल रिपोर्ट देखे किसी भी तरह का नशे का आरोप लगाना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी है.
हमारे घर में कोई पीता नहीं
नशे को लेकर चल रही चर्चाओं पर केके मिश्रा बेहद आहत दिखे. उन्होंने दो टूक कहा, हमारे घर में कोई शराब नहीं पीता. कोई नशे में नहीं था. यह बात मैं पूरे भरोसे से कह रहा हूं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.
वकील का बड़ा दावा
इस मामले में मिश्रा परिवार के वकील धर्मेंद्र सिंह धर्म ने भी अहम जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति तौफीक अहमद के घायल होने की बात कही जा रही है, उसने अदालत में लिखित रूप से दिया है कि उसने कोई FIR दर्ज नहीं कराई है. वकील के अनुसार, उसकी तरफ से दी गई किसी भी एप्लीकेशन पर कोई दस्तखत नहीं हैं. ऐसे में पूरे केस की नींव ही सवालों के घेरे में है.
सिमर चावला