MLA अभय सिंह को 19 साल बाद राहत, लखनऊ के शत्रुघ्न सिंह–जितेंद्र त्रिपाठी डबल मर्डर केस में कोर्ट से बरी

लखनऊ में 19 साल पुराने शत्रुघ्न सिंह–जितेंद्र त्रिपाठी दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. 2007 में बाजारखाला क्षेत्र में गोली मारकर हत्या की गई थी. 2008 में चार्जशीट दाखिल हुई थी और लंबे समय तक सुनवाई चली. अब फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई, जबकि पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

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13 अगस्त 2008 को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. Photo ITG 13 अगस्त 2008 को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. Photo ITG

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

लखनऊ के चर्चित शत्रुघ्न सिंह और जितेंद्र त्रिपाठी दोहरे हत्याकांड में आखिरकार 19 साल बाद बड़ा फैसला सामने आया है. एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस फैसले के साथ ही लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का अंत हो गया.

अदालत के फैसले के अनुसार, गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह के अलावा रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया. कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया.

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यह मामला 31 मार्च 2007 का है, जब बाजारखाला क्षेत्र में स्थित पूर्वांचल टेंट हाउस में घुसकर बदमाशों ने शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और उनके नौकर जितेंद्र त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी थी. घटना रात करीब 9 बजे की बताई गई, जब बाइक सवार हमलावरों ने दोनों को निशाना बनाया और मौके से फरार हो गए.

इस हत्याकांड में रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद को नामजद किया गया था, जबकि अभय सिंह पर साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. हालांकि, घटना के समय अभय सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जेल में बंद थे.

मामले की जांच के बाद लखनऊ पुलिस ने 13 अगस्त 2008 को सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इसके बाद से यह मामला अदालत में विचाराधीन रहा.

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करीब दो दशकों तक चली सुनवाई के बाद अब कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस फैसले के बाद मामले को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं, वहीं पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.

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