20 फरवरी की भोर, करीब साढ़े चार बजे. कहा जा रहा है कि लखनऊ के आशियाना इलाके के घर में एक गोली चली वह भी इतनी नजदीक से कि जान ले गई. लेकिन उसी घर में सो रहे परिजनों और पड़ोसियों को उसकी आवाज सुनाई नहीं दी. वहीं बेटी ने पिता का शव देखकर भी तीन दिन तक नॉर्मल व्यवहार किया जैसे कुछ हुआ ही नहीं. यहीं से शुरू होता है लखनऊ के उस सनसनीखेज कांड का सबसे उलझा हुआ हिस्सा, जिसने पूरे शहर को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है.
पुलिस के मुताबिक, मानवेंद्र की हत्या उसके ही बेटे अक्षत ने की. आरोप है कि वारदात घर के भीतर हुई और घरवालों को भनक तक नहीं लगी. दूसरे तल पर भाई अरविंद की पत्नी और बच्चे सो रहे थे. परिवार का दावा है कि हम गहरी नींद में थे. लेकिन जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि क्या पक्की दीवारों वाला घर गोली की आवाज को यूं ही निगल सकता है? या फिर कहानी में अब भी कुछ अनकही परतें बाकी हैं?
सामान्य दिनचर्या का दिखावा
हत्या के बाद घर में जो सामान्यता दिखाई गई, वह भी सवालों के घेरे में है. बेटी कृति अपने एग्जाम देने जाती रही. पड़ोसियों को लगा कि घर में सब कुछ सामान्य है. वहीं आरोप है कि अक्षत शव को ठिकाने लगाने की तैयारी में जुटा रहा आरी और नीला ड्रम खरीदकर लाया गया. चाची नम्रता से रोजमर्रा की तरह मिलना-जुलना जारी रहा, ताकि किसी को कमरे में झांकने का शक न हो. बाहर से सब कुछ सामान्य दिखे यही कोशिश थी, ऐसा जांच से जुड़े लोग कह रहे हैं. लेकिन इस ‘सामान्यता’ की परत के नीचे क्या चल रहा था, अब वही पुलिस की पड़ताल का केंद्र है.
बेटी की चुप्पी डर या मिलीभगत?
पूछताछ में सामने आया कि वारदात के बाद कृति कमरे में मौजूद थी. उसने पिता का खून बहते देखा इसके बाद भी वह चुप रही. लगभग 40 मिनट की गहन पूछताछ के बाद उसके बयान दर्ज किए गए. जांच एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि यह चुप्पी महज डर का परिणाम थी या फिर किसी दबाव का? क्या वह भयभीत थी, या घटनाक्रम की जानकारी होते हुए भी उसने सच छिपाया? पुलिस आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रही है, लेकिन सूत्र मानते हैं कि उसके बयान मामले की दिशा तय कर सकते हैं.
रोज आती है… लगा ही नहीं कि उसके घर में लाश है
घटना के बाद एक और चौंकाने वाली बात सामने आई. पड़ोस में रहने वाले उदयवीर सिंह के परिवार के अनुसार, मानवेंद्र की 11वीं में पढ़ने वाली बेटी रोज की तरह उनकी पोती के घर पढ़ने आती रही. वह सामान्य दिखती थी पढ़ाई करती, खाना खाती और वापस चली जाती. परिवार का कहना है, ऐसा नहीं लगा कि उसके सामने पिता की हत्या हुई है या घर में शव के टुकड़े रखे हैं. उसने अपनी सहेली तक को भनक नहीं लगने दी. यह व्यवहार जांचकर्ताओं को उलझा रहा है क्या यह मानसिक आघात की प्रतिक्रिया है, या कुछ और?
संदेह से बचने की कहानी भी रची
हत्या के बाद जो हुआ, उसने मामले को और पेचीदा बना दिया. आरोप है कि अक्षत ने शक से बचने के लिए एक सोची-समझी स्क्रिप्ट तैयार की. उसने ‘पापा लौट आओ’ नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें मानवेंद्र के करीबी दोस्तों को जोड़ा गया. ग्रुप में भावुक संदेश डाले गए जैसे पापा आप कहां हैं, वापस आ जाइए… कृति और मैं आपको मिस कर रहे हैं. सिर्फ मैसेज ही नहीं, बल्कि दोस्तों के साथ पिता की तलाश का दिखावा भी किया गया. सूत्र बताते हैं कि यह ग्रुप महज भावनात्मक अपील नहीं था, बल्कि एक निगरानी तंत्र भी था जैसे कौन क्या सोच रहा है, कौन किस दिशा में तलाश की बात कर रहा है, सब पर नजर रहे.
खून के छींटे और ताजा पेंट
जांच में यह भी सामने आया है कि गोली लगते ही कमरे में खून फैल गया था. दीवारों पर पड़े छींटों को मिटाने के लिए अक्षत पेंट खरीदकर लाया और दीवारों को रंग दिया. एक-एक निशान मिटाने की कोशिश की गई. लेकिन सच्चाई का रंग ज्यादा गहरा निकला. फॉरेंसिक टीम ने दीवारों की सतह, फर्श और अन्य सामान से नमूने जुटाए हैं. पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हुई. पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट कई अहम बिंदुओं पर रोशनी डालेगी जैसे गोली की दिशा, दूरी और समय.
सख्ती, तनाव और बढ़ती दूरी
पड़ोसियों के मुताबिक, मानवेंद्र अपनी बेटी की कुछ हरकतों से परेशान थे. उन्होंने घर में सख्ती बढ़ा दी थी. वे अक्सर कहते थे कि बच्चों के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी, दूसरी शादी तक नहीं की. यह बात अक्षत को खटकती थी ऐसा कुछ लोगों का दावा है. पुलिस की लोकेशन ट्रैकिंग से यह भी सामने आया कि 20 फरवरी को अक्षत काकोरी गया था और जानबूझकर फोन ऑन किया, ताकि आखिरी लोकेशन घर की बजाय काकोरी दिखे. यह कदम क्या पूर्व-नियोजित था? या फिर महज संयोग? जांच इसी धुरी पर घूम रही है.
गोली की गूंज अब भी अनसुनी
सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है गोली चली, लेकिन किसी ने सुनी क्यों नहीं? क्या साइलेंसर का इस्तेमाल हुआ? क्या घर की बनावट ने आवाज दबा दी? या फिर समय ऐसा था जब आसपास सन्नाटा था? फॉरेंसिक रिपोर्ट और बैलिस्टिक जांच से ही इस पहेली का उत्तर मिल सकेगा. परिवार का दावा है कि सभी गहरी नींद में थे. लेकिन जांचकर्ता हर संभावना की पड़ताल कर रहे हैं.
आशीष श्रीवास्तव