कानपुर में इस बीते रविवार की शाम जब लोग रोज की तरह अपने-अपने काम से लौट रहे थे, तब ग्वालटोली इलाके में अचानक चीख-पुकार मच गई. वजह थी एक चमचमाती लैंबॉर्गिनी कार, जिसने पहले एक बाइक सवार को टक्कर मारी, फिर एक ऑटो से जा भिड़ी और आखिरकार फुटपाथ पर चढ़ गई. रफ्तार थोड़ी और ज्यादा होती, तो यह हादसा कई जिंदगियां लील सकता था. यह लग्जरी कार बंशीधर टोबैको प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर और केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की है. हैरानी की बात यह रही कि वीडियो में दुर्घटना के बाद शिवम मिश्रा को गाड़ी से बाहर निकलते देखा गया, इसके बावजूद FIR में उनका नाम नहीं था.
डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है और गाड़ी को जब्त कर लिया गया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. 8 फरवरी को हुए इस हादसे में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई. प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने ग्वालटोली थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया. वहीं इस दुर्घटना के बाद जब कार को थाने लाया गया तो उस पर कवर लगा दिया गया, जिससे उस पर कोई खरोच ना लग पाए.
200 की रफ्तार पर सवाल
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यूजर अक्षय आर्य ने एक वीडियो और पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि 6 फरवरी को दिल्ली से वृंदावन के बीच यमुना एक्सप्रेसवे पर एक लैंबॉर्गिनी कार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से दौड़ती दिखी.
इनकम टैक्स की छापेमारी के बाद हुआ खुलासा
मार्च 2024 में बंशीधर टोबैको ग्रुप उस वक्त राष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब आयकर विभाग ने कानपुर और दिल्ली समेत कई राज्यों में कंपनी से जुड़े 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई सिर्फ एक कारोबारी जांच नहीं थी, बल्कि इसने मिश्रा परिवार की कार्यशैली और जीवनशैली पर भी रोशनी डाल दी. इनकम टैक्स अधिकारियों के अनुसार, जब वे छापेमारी के दौरान एक ठिकाने पर पहुंचे, तो शिवम मिश्रा ने कथित तौर पर अपनी पिस्तौल अधिकारियों की ओर तान दी. बाद में उन्होंने यह कहकर सफाई दी कि उन्हें लगा कोई लूटपाट के इरादे से आया है. हालांकि यह मामला यहीं शांत हो गया, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल जरूर मचा दी.
VIP नंबर 4018: सिर्फ नंबर नहीं, पहचान
छापेमारी के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया. अधिकारियों को पता चला कि शिवम मिश्रा की करोड़ों रुपये की सभी लग्जरी गाड़ियों पर एक ही VIP नंबर-4018 दर्ज है. रोल्स रॉयस हो, लैंबॉर्गिनी, फेरारी, मैकलेरन या पोर्श हर गाड़ी पर वही नंबर. बताया जाता है कि यह नंबर परिवार के लिए सिर्फ एक रजिस्ट्रेशन नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल और लकी चार्म है. इसके लिए लाखों रुपये खर्च किए गए. जानकारों के मुताबिक, इस नंबर को हासिल करने और बनाए रखने के लिए विशेष प्रक्रियाओं और भारी फीस का सहारा लिया गया.
कम टर्नओवर, बड़ा कारोबार?
आयकर विभाग की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि मिश्रा परिवार द्वारा कम टर्नओवर दिखाकर बड़े पैमाने पर कारोबार छिपाया जा रहा था. अधिकारियों का दावा है कि कागजों में जो आंकड़े दिखाए गए, वे वास्तविक कारोबार से मेल नहीं खाते. जानकार बताते हैं कि केके मिश्रा उत्तर भारत के बड़े तंबाकू कारोबारियों में गिने जाते हैं और बाजार में तंबाकू के दाम तय करने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है. मिश्रा परिवार मूल रूप से कानपुर के शिवराजपुर क्षेत्र के एक गांव का निवासी है, लेकिन आज उनका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है.
कोविड लॉकडाउन और नैनीताल की कहानी
शिवम मिश्रा की एक और कहानी चर्चा में है. इसकी जड़ें कोविड महामारी के उस दौर तक जाती हैं, जब पूरा देश लॉकडाउन की जकड़ में था. उसी दौरान दावा किया जाता है कि शिवम मिश्रा कानपुर से अपनी लग्जरी कार लेकर नैनीताल पहुंच गए थे. उस वक्त पहाड़ी इलाकों में सख्त निगरानी थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी मौजूदगी ने स्थानीय प्रशासन का ध्यान खींचा. सूत्रों के मुताबिक, नैनीताल में उनकी पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई थी. आरोप है कि काली पोर्श कार में सवार एक महिला ने पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी की और यहां तक कि एक पुलिसकर्मी को लात मारने की बात भी सामने आई. विवाद की जड़ थी कार के शीशों पर लगी काली फिल्म, जिसे हटाने के निर्देश पुलिस ने दिए थे. यह मामला उस समय दब गया, लेकिन इसने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि क्या नियम-कानून लग्जरी और रसूख के आगे बौने पड़ जाते हैं?
दौरा पड़ने का दावा और बड़ा सवाल
हादसे के बाद यह दलील सामने आई कि शिवम मिश्रा को अचानक दौरा पड़ा था, जिसके चलते वह कार पर नियंत्रण नहीं रख सके. बताया गया कि उन्होंने स्थिति को समझते हुए कार को फुटपाथ की ओर मोड़ दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया. लेकिन यही दलील कई सवाल भी खड़े करती है. अगर किसी व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं, तो उसे इतनी हाई-स्पीड सुपरकार चलाने की अनुमति कैसे दी गई? अगर उस समय कई लोगों की जान चली जाती, तो जिम्मेदारी किसकी होती?
लग्जरी लाइफस्टाइल और सवालों का बोझ
रोल्स रॉयस, फेरारी, लैंबॉर्गिनी जैसी कारें, डायमंड घड़ियां, हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल यह सब शिवम मिश्रा की पहचान का हिस्सा बन चुका है. लेकिन हर नई घटना के साथ यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि क्या कानून और सिस्टम सबके लिए बराबर है?
सिमर चावला