अध्यात्म की शरण में इटली की लुक्रेजिया… पिता संग प्रयागराज पहुंचीं, हाथ जोड़कर बोलीं- 'जय श्रीराम'

संगम की पावन रेती पर लगे माघ मेले में उस वक्त खास नजारा देखने को मिला, जब इटली से आई लुक्रेजिया अपने पिता के साथ साधु-संतों के सानिध्य में पहुंचीं. सनातन धर्म को समझने आई विदेशी युवती ने बाबा को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और 'जय श्रीराम' का जयकारा लगाकर अध्यात्म के प्रति अपना भाव प्रकट किया.

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पिता संग प्रयागराज पहुंचीं इटली की लुक्रेजिया. (Photo: Screenrab) पिता संग प्रयागराज पहुंचीं इटली की लुक्रेजिया. (Photo: Screenrab)

आनंद राज

  • प्रयागराज,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

संगम की पावन रेती… चारों ओर साधु-संतों के शिविर, धूप-अगरबत्ती की खुशबू और श्रद्धा से भरी आवाजें. माघ मेले की इसी आध्यात्मिक हवा में एक अलग तस्वीर देखने को मिली. इटली से आई एक युवती अपने पिता के साथ भारतीय संतों के सानिध्य में बैठी दिखाई दी. विदेशी चेहरे पर भारतीय अध्यात्म की चमक और होठों पर 'जय श्रीराम' का उद्घोष... यह दृश्य हर किसी को आकर्षित कर रहा था.

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इटली की रहने वाली लुक्रेजिया अपने पिता के साथ कुंभ के बाद अब माघ मेले में प्रयागराज पहुंची हैं. संगम तट पर लगे मेले में वे न केवल आस्था की डुबकी लगाने आईं, बल्कि सनातन धर्म को गहराई से समझने की जिज्ञासा लेकर यहां पहुंचीं. पिता-पुत्री की यह जोड़ी अलग-अलग साधु-संतों के शिविरों में जाती दिखी, कभी किसी बाबा के पास ध्यान की विधि समझी, तो कभी जीवन के अर्थ पर सवाल करती दिखी.

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मेले में मनमौजी राम बाबा का शिविर लगा है. लुक्रेजिया उनके शिविर में अपने पिता के साथ पहुंचीं. बाबा के सामने हाथ जोड़कर बैठी लुक्रेजिया पूरे मनोयोग से उनकी बातें सुनती रहीं. कभी आंखें बंद कर ध्यान लगाया, तो कभी मुस्कुराते हुए 'जय श्रीराम' का जयकारा लगाया. उनके साथ बैठे पिता भी उतनी ही श्रद्धा से बाबा की शिक्षाओं को आत्मसात करते नजर आए.

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लुक्रेजिया का कहना है कि सनातन धर्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है. यह सिर्फ पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि जीवन जीने का तरीका सिखाता है. योग, ध्यान और आत्मचिंतन की बातें उन्हें खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं. यही वजह है कि वे रोज किसी न किसी संत के पास जाकर आध्यात्मिक ज्ञान ले रही हैं.

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मनमौजी राम बाबा बताते हैं कि हर साल माघ मेला और कुंभ के दौरान कई विदेशी उनके पास आते हैं. वे सनातन धर्म के सिद्धांतों, साधना पद्धतियों और जीवन मूल्यों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं. बाबा के अनुसार, विदेशी श्रद्धालु जब यहां से लौटते हैं, तो अपने देश में भी भारत की आध्यात्मिक परंपराओं का संदेश लेकर जाते हैं.

लुक्रेजिया और उनके पिता के लिए यह यात्रा धार्मिक भ्रमण के साथ आत्मिक अनुभव है. वे कहते हैं कि यहां उन्हें शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण मिला है.

इटली लौटकर वे अपने दोस्तों और परिवार को सनातन धर्म, उसकी आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों के बारे में बताएंगे. माघ मेले में जब विदेशी युवती खुशी-खुशी जय श्रीराम और “सनातन धर्म की जय” का उद्घोष करती नजर आई, तो वहां मौजूद लोग भी भावविभोर हो उठे. इस मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने उनके साथ तस्वीरें खिंचाईं.

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