दिल्ली से सटे गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाली 13 साल की मानसी हिम्मत और जज्बे की मिसाल बन गई हैं. पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली मानसी जन्म से सामान्य थीं, लेकिन बचपन में ही उनके दोनों हाथों का विकास रुक गया. दोनों हाथों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं माना. आज वह अपने पैरों से वह सब काम करती हैं, जो आम लोग हाथों से करते हैं.
मानसी पैरों से लिखती हैं, पढ़ाई करती हैं, अपना स्कूल बैग उठाती हैं, खाना खाती हैं और रोजमर्रा के कई काम खुद संभालती हैं. उन्हें ड्राइंग और पेंटिंग करना सबसे ज्यादा पसंद है. उनकी बनाई पेंटिंग्स देखकर लोग हैरान रह जाते हैं कि ये सब उन्होंने पैरों से बनाया है.
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मां का हौसला बना ताकत
मानसी की मां मंजू घरों में काम करती हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटी का हौसला कभी टूटने नहीं दिया. मंजू बताती हैं कि उन्होंने एम्स जैसे बड़े अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कहा कि हाथ ठीक नहीं हो पाएंगे. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि बेटी को पढ़ाई के जरिए मजबूत बनाना है.
मंजू कहती हैं कि जब तक वह जिंदा हैं, बेटी को काबिल बनाने की कोशिश करती रहेंगी. 2021 में मानसी के पिता की ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई थी. इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी और बढ़ गई, लेकिन मां-बेटी ने हिम्मत नहीं हारी.
स्कूल में भी मिल रहा साथ
इंदिरापुरम स्थित कंपोजिट स्कूल की प्रिंसिपल भारती रावत बताती हैं कि मानसी पैरों से इतनी सुंदर लिखती हैं, जितना कई बच्चे हाथों से भी नहीं लिख पाते. पढ़ाई में भी वह पीछे नहीं हैं. प्रिंसिपल का कहना है कि उनकी पेंटिंग देखकर विश्वास ही नहीं होता कि वह पैरों से बनाई गई है. स्कूल प्रशासन उनकी हर संभव मदद कर रहा है.
स्कूल से लौटने के बाद मानसी घर के कामों में भी मदद करती हैं. वह सूई में धागा डालती हैं, सिलाई करती हैं, सजावटी सामान बनाती हैं और तरह-तरह के पकवान भी तैयार करती हैं. उन्हें पास्ता, ब्रेड के काला जामुन जैसे व्यंजन बनाना पसंद है. मानसी ने साबित कर दिया है कि तकदीर हाथों में नहीं, बल्कि हौसलों में होती है.
मनीष चौरसिया