माघ मेले में डिफेंडर और पोर्शे जैसी महंगी गाड़ियों से चलने के कारण सुर्खियों में आए सतुआ बाबा ने इसका विरोध करने वालों को चेतावनी दी है. सतुआ बाबा ने कहा कि लोग यह समझ लें कि सनातन केवल धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि अर्थ, शास्त्र, शस्त्र और रफ्तार का भी प्रतीक है. उन्होंने कहा कि अब सनातन की रफ्तार को जो रोकेगा, उसे इन्हीं गाड़ियों की रफ्तार से कुचल दिया जाएगा. सतुआ बाबा ने साफ किया कि उनका ध्येय किसी विवाद में पड़ना नहीं, बल्कि अपने पड़ाव तक पहुंचना है. उन्होंने कहा कि गाड़ी कोई भी हो, लेकिन उसकी रफ्तार से उन लोगों को जवाब दिया जाएगा जो जातियों में बांटने, समाज को तोड़ने और राम पर गोलियां चलाने का काम करते रहे हैं.
माघ मेले में सतुआ बाबा को डिफेंडर और पोर्शे जैसी लग्ज़री गाड़ियों में चलते देखे जाने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे. कई लोगों ने संत परंपरा और सादगी को लेकर सवाल खड़े किए. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सतुआ बाबा ने कहा कि उन्हें गाड़ियों के नाम और कीमत की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, मुझे गाड़ियों के नाम नहीं पता. ये कितने की हैं, ये भी मुझे नहीं पता. अगर यह सब जानना है तो उसके लिए गूगल बाबा हैं. मेरा काम इन गाड़ियों से चलना, अपने पड़ाव तक पहुंचना और अपनी गति बनाए रखना है.
सनातन कमजोर नहीं है
सतुआ बाबा ने सवाल उठाया कि क्या भारत का सनातन इतना कमजोर है कि कोई गाड़ियों में बैठने से उसे गलत समझ ले. उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है और यहां स्वतंत्रता का राज है. जिसे जो समझना है, समझे. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी गरीब की कुटिया में बिजली नहीं पहुंचाई, भूखे को भोजन नहीं दिया और सड़कों को रफ्तार नहीं दी, वही आज सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भारत है, जहां विकास की रफ्तार तेज है और आगे भी तेज होती जाएगी.
जेसीबी से फरारी तक एक ही नजरिया
महंगी गाड़ियों पर चर्चा के बीच सतुआ बाबा ने कहा कि उनके लिए गाड़ियों की कीमत कोई मुद्दा नहीं है. उन्होंने कहा कि जेसीबी भी महंगी है, ठेला भी महंगा है, बुलेट भी महंगी है, जीप भी महंगी है, डिफेंडर भी महंगी है और फरारी भी महंगी है. उनका कहना था कि विषय गाड़ी नहीं, बल्कि लक्ष्य है. लक्ष्य है अपने पड़ाव तक पहुंचना और वहां से सनातन ध्वज को आगे बढ़ाना. सतुआ बाबा ने माघ मेले के आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह माघ मेला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित हो रहा है और संत समाज इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है. उन्होंने बताया कि वे संतों की खाट-चोट व्यवस्था समिति के पदाधिकारी हैं और व्यवस्थाओं में योगदान दे रहे हैं. बाबा ने कहा कि माघ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी यह साबित करती है कि सनातन परंपरा आज भी समाज की मुख्यधारा में है.
सतुआ पीठ का बताया अर्थ
सतुआ बाबा ने सतवा पीठ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक प्राचीन पीठ है. उन्होंने बताया कि सतुआ का अर्थ है कई तत्वों का एक साथ मिलना. जैसे अलग-अलग अनाज मिलकर सतुआ बनता है, वैसे ही समाज को भी एकजुट रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि सतवा पीठ मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में स्थित है, जो सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है. अपने बयान में सतुआ बाबा ने मणिकर्णिका घाट का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह राम नाम सत्य की अंतिम यात्रा का पड़ाव है. उनका कहना था कि जो सनातन से नहीं जुड़ेगा, जो उसे बांटेगा या तोड़ने की कोशिश करेगा, उसकी अंतिम यात्रा का सत्य भी तय है.
सतुआ बाबा ने विपक्ष और विधर्मियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि विपक्षियों और विधर्मियों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है. उनका स्थान पाकिस्तान है और उन्हें समय रहते वहां पहुंच जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत के विकास की रफ्तार अब और तेज होने वाली है और जो इसे रोकने की कोशिश करेगा, वह पीछे रह जाएगा.
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