अब्दुल्ला बने शिव प्रसाद और फातिमा बनीं कविता... दंपति ने सुंदरकाण्ड और हवन करवाकर अपनाया सनातन धर्म

यूपी के फतेहपुर (Fatehpur) में एक मुस्लिम दंपति ने सनातन धर्म अपना लिया है. इस दंपत्ति का कहना है कि 25 वर्ष पूर्व बनारस में किन्हीं कारणों से इस्लाम अपना लिया था. अब फिर से सनातनी हो गए हैं. घर में सुंदरकाण्ड व हवन के बाद अब्दुल्ला शिवप्रसाद और फातिमा अब कविता हो गईं हैं.

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दंपत्ति ने अपनाया सनातन धर्म. दंपत्ति ने अपनाया सनातन धर्म.

नीतेश श्रीवास्तव

  • फतेहपुर,
  • 21 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर (Fatehpur) में मुस्लिम दंपति ने सुंदरकाण्ड व हवन पूजन के साथ सनातन धर्म अपना लिया. दंपत्ति का कहना है कि 25 साल पहले बनारस से काम के सिलसिले में यहां आया था. यहां आकर मुस्लिम परिवार के घर पर रह रहा था. उन्हीं के कहने पर इस्लाम अपना लिया था. अब फिर से वे सनातनी हो गए हैं.

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फतेहपुर के हथगाम थाना क्षेत्र के अधारी गांव के रहने वाले अब्दुल्ला और उनकी पत्नी फातिमा ने सनातन धर्म अपनाते हुए अपना नाम शिव प्रसाद और पत्नी का नाम दोबारा कविता रख लिया है. 25 वर्ष पहले बनारस के रहने वाले शिव प्रसाद अपनी पत्नी कविता के साथ रोजगार के सिलसिले में अधारी गांव आए थे. यहां मुस्लिम परिवार के घर पर किराए पर रहने लगे थे. यहां मुस्लिम परिवार के कहने पर इस्लाम अपना लिया था.

बीते 6 महीने पहले इस दंपति ने अधारी गांव में अपना घर बनवा लिया. इसी बीच हिंदू संगठन के लोगों से संपर्क कर पूरी बात बताई. इसके बाद मंगलवार को हिंदू संगठन के लोगों की मौजूदगी में घर पर सुंदरकाण्ड का पाठ करवाया और हवन पूजन कर सनातन धर्म अपना लिया. दोनों काफी खुश दिखे और बोले कि हम दोबारा सनातनी हो गए.

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शिव प्रसाद ने कहा कि हम सनातनी थे, सनातनी ही रहेंगे. हमको कोई शिकवा शिकायत नहीं है. ऐसी स्थितियां हो जाती हैं. आदमी कहीं रहने लगे या कोई काम करने लगे तो उसकी वजह से अपने माहौल में चेंज करना, यह हो जाता है, ऐसी मजबूरियां हो जातीं हैं.

राम दल के अध्यक्ष ने क्या कहा?

राम दल अध्यक्ष अगेंद्र साहू ने कहा कि हमारे हिंदू समाज के एक व्यक्ति, जिन्होंने किन्हीं कारणों से आज से 20 से 25 वर्ष पहले मुस्लिम धर्म अपना लिया था. उन्होंने हमारे सामने 20 दिन पहले बात रखी कि हिंदू धर्म में फिर से आना चाहते हैं.

हमने उनको सुरक्षा दी और पूरी मदद की. वह जो भी कर रहे हैं, स्वेच्छा से कर रहे हैं. हम लोगों का कोई दबाव नहीं है. हम उनको एक मंच दे रहे हैं, ताकि वह आ सकें. इसलिए उनके घर पर सुंदरकाण्ड का आयोजन किया गया है. हवन कार्यक्रम भी किया जाएगा, उसके बाद भंडारा भी चलेगा.

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