सीएम योगी ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम, चार अफसरों के बर्खास्तगी की पूरी कहानी 

सीएम योगी का बड़ा एक्शन चर्चा का विषय है. समाज कल्याण विभाग में वर्षों पुराने घोटाले करने वालों पर गाज गिर चुकी है. भ्रष्टाचार के दोषी चार अफसरों को बर्खास्त कर दिया गया है. तीन रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन में 10 से 50% तक कटौती के आदेश दिए गए हैं . जांच में छात्रवृत्ति और पेंशन के करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ.

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Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath (Photo: ITG) Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath (Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 10 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:50 PM IST

सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर बड़ा कदम उठाया गया है. सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत समाज कल्याण विभाग के चार अधिकारियों बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि तीन रिटायर्ड अधिकारियों की पेंशन में 10 से 50 प्रतिशत तक स्थायी कटौती का आदेश जारी हुआ. 

कहानी की शुरुआत: दस साल पुराना घोटाला

यह मामला कोई ताजा नहीं है. इसकी जड़ें एक दशक पहले तक जाती हैं, जब समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की बंदरबांट हुई थी. लाभार्थियों की सूची से लेकर खातों में ट्रांजैक्शन तक, हर स्तर पर धांधली का जाल बिछाया गया था. वर्षों से फाइलें दबाई जाती रहीं, जांच आगे नहीं बढ़ पाई, और दोषी अधिकारी सेवानिवृत्ति या तबादले के सहारे बचते रहे. लेकिन अब, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों पर, इन पुराने मामलों को फिर से खोला गया. समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की देखरेख में जांच टीमों ने सभी पुराने दस्तावेज खंगाले और गबन की रकम का पूरा हिसाब निकाला.

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चार अधिकारी, चार कहानियां:  भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क

बर्खास्त किए गए अधिकारियों में मीना श्रीवास्तव (श्रावस्ती), करुनेश त्रिपाठी (मथुरा), संजय कुमार व्यास (हापुड़) और राजेश कुमार (शाहजहांपुर) शामिल हैं. इन सभी के खिलाफ आरोप गंभीर थे, लेकिन जांच में जो सामने आया, उसने सबको हैरान कर दिया.

 मीना श्रीवास्तव – आंकड़ों की जादूगरनी

मीना श्रीवास्तव पर आरोप था कि उन्होंने छात्रवृत्ति के लाभार्थियों के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा किया. असली छात्रों की जगह काल्पनिक नाम जोड़े गए, और फर्जी खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कराए गए. जांच में पाया गया कि डेटा में बदलाव खुद उनके निर्देश पर हुआ.

करुनेश त्रिपाठी और संजय व्यास – छात्रवृत्ति का खेल

इन दोनों अधिकारियों ने मिलकर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि अमान्य निजी संस्थानों में भेजी. कई कॉलेज ऐसे थे जो कागज पर मौजूद थे, जमीनी स्तर पर नहीं. ट्रांजैक्शन के दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि कुछ रकम निजी खातों में डायवर्ट की गई.

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राजेश कुमार – बैंक खातों में हेराफेरी का मास्टरमाइंड

शाहजहांपुर के पूर्व अधिकारी राजेश कुमार ने पेंशन वितरण की पूरी प्रणाली में सेंध लगाई. लाभार्थियों के बैंक खाते बदलकर फर्जी खातों में रकम ट्रांसफर की गई. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कई “पेंशन प्राप्तकर्ता” ऐसे थे जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था.

तीन रिटायर्ड अफसर भी नहीं बचे

सरकार ने कार्रवाई यहीं खत्म नहीं की. सेवानिवृत्त अधिकारियों  श्री भगवान (औरैया), विनोद शंकर तिवारी (मथुरा) और उमा शंकर शर्मा (मथुरा) पर भी शिकंजा कसा गया. इनकी पेंशन में 10 से 50 प्रतिशत तक की स्थायी कटौती की गई है. साथ ही, जिन योजनाओं में इनकी भूमिका से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ, उनकी वसूली की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति फिर चर्चा में

कुछ अधिकारियों  का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम एक स्पष्ट संदेश है भ्रष्टाचार करने वालों को अब कोई रियायत नहीं मिलेगी. पिछले कुछ वर्षों में, योगी सरकार ने शिक्षा, नगर निकाय, राजस्व और अब समाज कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार कार्रवाई की है. मंत्री असीम अरुण ने कहा मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. कई लंबित मामलों को जल्द ही फिर से खोला जाएगा और जहाँ जरूरत होगी, वहां एफआईआर दर्ज की जाएगी. 

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एफआईआर और वसूली की तैयारी

सरकार ने दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और गबन की गई सरकारी धनराशि की वसूली के निर्देश जारी कर दिए हैं. सूत्रों के अनुसार, फिलहाल शुरुआती अनुमान में करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आई है, और यह आंकड़ा आगे बढ़ सकता है. विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी अब भी जांच के घेरे में हैं, जिनके नाम जल्द सार्वजनिक किए जा सकते हैं.

क्यों खास है यह कार्रवाई

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकार ने भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की हो, लेकिन इस बार फर्क यह है कि दस साल पुराने मामले दोबारा खोले गए और जांच पूरी पारदर्शिता से की गई. अक्सर देखा गया है कि समय बीत जाने पर ऐसे मामलों की फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं, लेकिन योगी सरकार ने यह साबित कर दिया कि भ्रष्टाचार का कोई एक्सपायरी डेट नहीं होता.

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