कानपुर: CAA-NRC का विरोध करने वाले जिन लोगों से लिया गया था जुर्माना, अब वापस करने के लिए घर पहुंच रही पुलिस

सीएए का नोटिफिकेशन जारी होते ही इसके कई तरह के असर भी दिखने लगे हैं. कानपुर से ऐसी सूचना है कि 2019 में CAA-NRC के विरोध में हिंसा और प्रदर्शन करने के आरोपियों के घर पुलिस पहुंच रही है. इससे इन लोगों में हड़कंप मचा हुआ है. जब इस बारे में पता किया गया तो जानकारी मिली की पुलिस आरोपियों के घर सत्यापन के लिए पहुंच रही है, ताकि जुर्माने की रकम वापस की जा सके.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

सिमर चावला

  • कानपुर,
  • 13 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 2:39 PM IST

एक तरफ केंद्र सरकार ने सोमवार को CAA-NRC का नोटिफिकेशन जारी किया. वहीं दूसरी तरफ कानपुर में कुछ लोगों की परेशानी बढ़ गई. दरअसल, कानपुर में वैसे लोगों के दरवाजे पर पुलिस दस्तक दे रही है, जिन लोगों ने 2019 में सीएए और एनआरसी का विरोध किया था. उस वक्त हुए विरोध प्रदर्शन में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था. उनमें से कई लोग अभी जमानत पर बाहर हैं. ऐसे लोगों को अब डर सताने लगा है. 

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कानपुर में  साल 2019 में CAA-NRC के विरोध में हुए प्रदर्शन और हिंसा में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था. बाद में उन पर हिंसा में संपत्ति नुकसान को लेकर भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया था. अब उनके घर पुलिस पहुंचने लगी है. दरअसल, कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ऐसे लोगों का सत्यापन कर रही है, जो लोग हिंसा के आरोपी थे और मौजूदा समय में जमानत पर बाहर हैं.

2019 हिंसा में आरोपी लोग कर रहे अपने वकील से संपर्क
2019 हिंसा मामले में 530 लोगों का जमानत कराने वाले और कोर्ट में आरोपियों का केस लड़ने वाले सीनियर एडवोकेट नासिर खान ने बताया कि बीते 2 दिनों से लगातार ऐसे लोग संपर्क कर रहे हैं, जो 2019 की हिंसा मामले में जमानत पर बाहर हैं. उनके घर पुलिस सत्यापन के लिए पहुंच रही है. उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में लगातार न्यायालय में सुनवाई हो रही है. 

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हिंसा मामले में जुर्माने की रकम लौटाने के लिए हो रहा सत्यापन
अधिवक्ता का कहना है कि हिंसा के दौरान हुई संपत्ति के नुकसान मामले में जिन लोगों पर जुर्माना लगाया गया था, 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आर्डर पर जमा किए गए जुर्माने की रकम वापस करने के आदेश जारी किए गए थे. लेकिन, अभी तक संपत्तियों का आकलन नहीं हो सका है. इस वजह से कुछ लोगों की जुर्माने की रकम अभी तक वापस नहीं हुई है. 4 साल बीत जाने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन जिला प्रशासन और जिरह करने वाले लोग नहीं कर पा रहे हैं.

जानकारी गलत होने के कारण नहीं वापस हो पा रहा जुर्माना
अधिवक्ता नासिर खान का कहना है कि चेक सरकार के खाते में ले तो लिए गए, लेकिन वापसी के वक्त कुछ के नाम गलत थे. वहीं कुछ की बाकी जानकारी गलत दे दी गई थई. भागदौड़ करने के बाद भी और जिलाधिकारी को एप्लीकेशन देने के बाद भी फिलहाल कई लोगों पर लगाया हुआ जुर्माना वापस नहीं हुआ है.

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