धोखे से कटी थी रस्सी, डूब गया था प्रेमी... भूरागढ़ किले की वह दास्तां, जिसके आगे फीकी हैं फिल्मी कहानियां; जहां मकर संक्रांति पर उमड़ते हैं कपल्स

Bhuragarh Fort Banda Love Story: बांदा के भूरागढ़ किले में मकर संक्रांति पर प्रेमी जोड़ों का मेला लगता है. यह किला एक नट और राजकुमारी की अधूरी प्रेम कहानी और 1857 के क्रांतिकारियों के बलिदान के लिए प्रसिद्ध है.

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केन नदी किनारे 650 साल पुराने दुर्ग में नटबली की मन्नत मांगने पहुंचते हैं कपल्स.(Photo:ITG) केन नदी किनारे 650 साल पुराने दुर्ग में नटबली की मन्नत मांगने पहुंचते हैं कपल्स.(Photo:ITG)

सिद्धार्थ गुप्ता

  • बांदा,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

UP के बांदा में मकर संक्रांति के त्योहार पर हर साल एक अनोखा मेला देखने को मिलता है, जहां बड़ी संख्या में प्रेमी जोड़े यानी कपल्स किले में पहुंचते हैं और यहां बने मंदिर में अपनी-अपनी मन्नत मांगते हैं. इस किले की भी कहानी किसी फिल्मी प्रेम कहानी से कम नहीं है. कपल्स किले के पास बह रही बांदा की जीवनदायिनी केन नदी में स्नान कर मंदिर के दर्शन करते हैं.  इस किले को भूरागढ़ का किला कहा जाता है, जो लगभग 650 वर्षों से बना हुआ है, जिसकी एक अलग ब्रिटिश हुकूमत की क्रांतिकारी और प्रेम कहानी है. ये किला बलिदानियों के भी जाना जाता है. जहां पूर्व में कई लोगों को फांसी दी गई तो कई लोगों ने अपनी जान गंवाई. आइए, जानते हैं इस किले की कहानी......

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कहा जाता है कई सौ साल पहले इस किले में एक राजा रहा करते थे, जिसकी बेटी को करतब नाच गाना दिखाने वाले नट से प्यार हो गया था, दोनों एक दूसरे से बहुत मोहब्बत करते थे और शादी करना चाहते थे. जब इस प्यार की कहानी की जानकारी राजा को हुई तो उसने अपने मंत्रियों से सलाह लेकर एक रणनीति बनाई.

राजा ने बेटी की शादी के लिए नट से रखी थी शर्त

राजा ने अपनी बेटी से शादी करने के लिए नट से अजीबोगरीब शर्त रखी थी. शर्त यह थी कि ''तुम यदि केन नदी से किले तक का सफर एक रस्सी के सहारे से तय लोगे तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा.'' तय समय पर नदी के दोनों छोरों पर रस्सी बांधी गयी. नट ने रस्सी के सहारे चलना शुरू किया और जब आधे से ज्यादा रास्ता तय भी कर लिया था.

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महाराजा छत्रसाल के भूरागढ़ किले में नट-राजकुमारी का अमर प्रेम.

राजा ने कटवा दी थी रस्सी, नट की नदी में डूबने से हुई थी मौत

जब राजा यह जान गया कि ये शर्त पूरी कर लेगा और मुझे अपनी बेटी की शादी नट से करनी पड़ जाएगी. जिसके बाद क्रोध में आकर राजा ने बेईमानी से उस रस्सी को काटने के लिए कई औजारों का प्रयोग किया, लेकिन रस्सी कटी नहीं, लेकिन अंत में रस्सी टूट ही गई और उस नट की डूबने से मौत हो गई, जिसकी याद में वहां एक मंदिर बनवाया गया था, जहां हर साल मकरसंक्रांति के दिन हर साल यहां कपल्स अपनी मनोकामनाएं मांगने आते हैं.

केन नदी किनारे 650 साल पुराना दुर्ग.

ब्रिटिश हुकूमत की बर्बरता का गवाह भी है ये किला

कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत और स्वतंत्रता संग्राम की कई यादें इस किले से जुड़ी हैं. इस दुर्ग में ब्रिटिश शासन में बहुत बर्बरता की गई, 1857 में यहां कई सैकड़ा लोगों को फांसी की सजा हुई थी, कई सैनिक भी मारे गए थे. आज भी यहां कई सैनिकों के बलिदान की निशानी बनी हुई है, जहां प्रशासन अपनी देखरेख में कार्यक्रम आयोजित कराता है. बताते हैं कि इस दुर्ग को छत्रसाल महाराजा ने बनवाया था, जिले के तमाम रिटायर्ड सैनिक शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देते हैं.

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