उत्तर प्रदेश के बलिया में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से मिट्टी का कटान तेज हो गया है. कटान से नदी किनारे बसे गांव के लोग दहशत में हैं और अपने आशियाने पर खुद ही बुलडोजर और हथौड़ा चलाने को मजबूर हैं. लोगों का कहना है कि कटान इतना तेज है कि नदी उनके घरों तक आ गई है.
घर नदी में विलीन होने के कगार पर है, इसलिए वो अपना घर तोड़कर उसका सामान लेकर सुरक्षित जगह जा रहे हैं. अबतक 13 लोग अपना घर तोड़ चुके हैं. जिलाधिकरी का कहना है कि नदी का पानी 80 से 100 मीटर कटान कर चुका है.
लोग खुद ही अपने मकानों को तोड़ ईंट और अन्य सामान दूसरी जगह ले जा रहे हैं. उनका कहना है कि ईंटों को वे इसलिए साथ में ले जा रहे हैं ताकि ये दूसरी जगह मकान बनाने के काम आ जाए. यह मंजर बांसडीह तहसील के अंतर्गत टिकुलिया और भोजपुरवा गांव में देखने को मिला.
दरअसल, बांसडीह तहसील क्षेत्र के भोजपुरवा गांव के लोग हथौड़ा और बुलडोजर चलाकर खुद ही अपने आशियाने को तोड़ रहे हैं. ये लोग सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद से हो रहे कटान से भयभीत हैं. उनका कहना है कि नदी का कटान काफी तेज है, जल्द ही उनका घर भी नदी में समा जाएगा. इसलिए वे खुद ही इसे तोड़ रहे हैं. पीड़ित लोगों के मुताबिक, जिले के अधिकारी हों या नेता सब आते तो हैं, वादा भी करते हैं लेकिन मसला हल नहीं हो पाता.
इस बीच सरयू नदी के कटान से हो रही त्रासदी को देखने खुद जिलाधिकारी बलिया भी भोजपुरवा गांव पहुंचे. उन्होंने लोगों को भरोसा दिया कि उनके साथ जो भी उचित होगा किया जाएगा. जिलाधिकारी ने कहा कि लगभग 80 से 100 मीटर तक सरयू नदी से कटान हो चुका है और गांव के 13 लोग अपना घर तोड़ चुके हैं. इन सभी के लिए रहने और खाने-पीने कि व्यवस्था कराई जा रही है. नियमानुसार जो भी उचित मुआवजा होगा वो दिलवाया जाएगा.
फिलहाल, यहां के लोगों की स्थिति सरयू नदी के कारण दयनीय बन चुकी है. कई घर पानी में समा गए हैं. कहीं बाकी घर भी इसी तरह न पानी में बह जाएं इसलिए लोग अपने-अपने घरों को तोड़ने में लग गए हैं. भोजपुरवा गांव के एक पीड़ित ने कहा कि जिस घर को हमने खून पसीने की कमाई से बनाया, अब उसे ही तोड़ना पड़ रहा है. कोई सुनवाई नहीं हो रही. हवा-हवाई आश्वासन दिए जा रहे हैं बस.
अनिल अकेला