NO मटरू... DM और 'मटरू लंगूर' की दोस्ती ने बदला धरने का मिजाज, VIDEO

बागपत कलेक्ट्रेट में किसान धरने के बीच डीएम अस्मिता लाल और 'मटरू' नाम के लंगूर का वीडियो वायरल हो गया. डीएम किसानों का ज्ञापन लेने पहुंची थीं. इसी दौरान लंगूर की शरारतों पर वह “NO मटरू” कहती दिखीं. डीएम के स्नेहिल व्यवहार से गंभीर माहौल हल्का हो गया और लोग इस पल को कैमरे में कैद करते नजर आए.

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धरने के बीच ‘NO मटरू’ की गूंज.(Photo: Screengrab) धरने के बीच ‘NO मटरू’ की गूंज.(Photo: Screengrab)

मनुदेव उपाध्याय

  • बागपत,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:36 PM IST

उत्तर प्रदेश के बागपत से एक अनोखा वीडियो सामने आया है. दरअसल, बागपत कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अलग ही नज़ारा देखने को मिला, जब किसान संगठन के धरने के बीच डीएम अस्मिता लाल और 'मटरू' नाम के एक लंगूर की दोस्ती चर्चा का विषय बन गई. कलेक्ट्रेट में किसानों की मांगों को लेकर गंभीर माहौल था, लेकिन कुछ ही देर में वहां का मिजाज बदल गया.

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वीडियो में डीएम अस्मिता लाल कभी मटरू को दुलारती नजर आती हैं तो कभी उसकी शरारत पर हल्के अंदाज में 'NO मटरू' कहकर डांट लगाती दिखती हैं. जब डीएम वहां से उठने लगीं तो लंगूर ने उनकी साड़ी पकड़कर जैसे उन्हें बैठने का इशारा किया. यह दृश्य देख मौके पर मौजूद लोगों की नजरें कुछ देर के लिए धरने से हटकर इस अनोखे पल पर टिक गईं.

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गंभीर माहौल में मुस्कान का पल

जानकारी के मुताबिक, डीएम अस्मिता लाल किसानों का ज्ञापन लेने और उनकी समस्याएं सुनने कलेक्ट्रेट पहुंची थीं. किसान संगठन का धरना चल रहा था और माहौल गंभीर था. मांगें भी सख्त थीं. इसी दौरान मटरू वहां पहुंच गया और उसकी चंचल हरकतों ने माहौल को हल्का कर दिया.

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देखें वीडियो...

धरने पर बैठे किसानों के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई. कई लोग इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए. सख्त प्रशासनिक भूमिका के बीच डीएम का यह स्नेहिल और सहज अंदाज लोगों को अलग ही संदेश देता दिखा.

पहले भी पशु प्रेम को लेकर रहीं चर्चा में

यह पहला मौका नहीं है जब डीएम अस्मिता लाल चर्चा में आई हों. इससे पहले भी वह पशु प्रेम को लेकर सुर्खियों में रह चुकी हैं. स्ट्रीट डॉग्स के लिए “पप्पी हाउस” बनवाने और परिंदों के लिए घर तैयार करवाने की पहल को लेकर उनका नाम सामने आ चुका है.

कलेक्ट्रेट का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. लोग इसे सिर्फ एक मजेदार पल नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच मानवीय संवेदनाओं की मिसाल के रूप में देख रहे हैं. यह घटना दिखाती है कि जिम्मेदारी कितनी भी बड़ी क्यों न हो, संवेदनशीलता हमेशा झलक ही जाती है.

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