विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी की (UGC) के नए नियमों और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी घटना के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री सरकार और ब्राह्मण समाज के नेताओं पर जमकर बरसे और कहा कि ऐसे नेता कॉर्पोरेट एम्प्लॉयी की तरह व्यवहार कर रहे हैं, उन्हें इस पर शर्म आनी चाहिए.
इस्तीफे के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, 'अगर आप देखेंगे तो इस सरकार में काफी समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चलाया जा रहा है. हाल की घटना को देखेंगे तो माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान जो घटना हुई है, उसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी पकड़कर उन्हें पीटा गया है. ब्राह्मण समाज में शिखा (चोटी) धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक है, उसका मान-मर्दन किया गया.'
उन्होंने आगे कहा, 'जो बटुक शिष्य हैं उन्हें गंदे तरीके से घसीटकर पीटा गया, बूढ़े-बूढ़े संन्यासियों को जूते-चप्पलों से मारा गया. अगर प्रशासन के लोग ही इस तरह का व्यवहार करेंगे तो अन्य लोग ब्राह्मण समाज पर कितना अत्याचार करेंगे. दूसरा मुद्दा ये है कि 13 जनवरी को यूजीसी का जो नया नियम आया है, जिसको लेकर भारत सरकार का गजट आया है, उसमें यूनिवर्सिटी में जो सामान्य वर्ग के छात्र हैं उन्हें स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है. उनके खिलाफ समता समिति के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जाएगी.'
UGC पर बोला हमला
आपके जो बेटे-बेटियां हैं, अगर बेटी है तो उसका शारीरिक शोषण समता समिति के माध्यम से फर्जी शिकायत के निपटारे के दौरान किया जा सकता है. अगर आपका बेटा प्रतिभावान है तो कोई भी आप पर एक फर्जी शिकायत डाल सकता है और उसका पूरा भविष्य बर्बाद कर सकता है. समता समिति के जो सदस्य हैं, वे उसका शोषण कर सकते हैं.
अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, 'इस पर सबसे बड़ी नाराजगी ये है कि जो हमारे समाज के जनप्रतिनिधि हैं, तथाकथित हमारी जाति के नेता हैं, जो खुद को ब्राह्मणों का नेता समझते हैं, वो लोग भी इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. ब्राह्मण एमपी, एमएलए चुप्पी साधकर बैठे हैं, जैसे वो किसी कॉर्पोरेट कंपनी के कर्मचारी हों. उनको लग रहा है कि जैसे कॉर्पोरेट कंपनी के सीईओ होते हैं, वो जब तक उन्हें निर्देश नहीं देंगे तब तक वो कुछ नहीं बोलेंगे.'
क्या है यूजीसी का वो नियम जिस पर बवाल मचा हुआ है
यूजीसी (University Grants Commission) ने Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नाम के नए नियम लागू किए हैं, जिसका मकसद कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में जाति-आधारित भेदभाव (caste discrimination) को रोकना और हर छात्र/शिक्षक को बराबरी का मौका देना है. इसके तहत हर उच्च शिक्षा संस्थान में Equal Opportunity/Equity Cell बनाना अनिवार्य होगा, जहां भेदभाव की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी और उन पर कार्रवाई होनी होगी.
SC, ST और अब OBC को भी स्पष्ट रूप से सुरक्षा मिलेगी और नियमों का उल्लंघन करने पर संस्थान को सख्त दंड भी झेलना पड़ सकता है. इन नियमों के कुछ प्रावधानों को लेकर जनरल/सवर्ण वर्ग और विश्वविद्यालयों में विरोध हो रहा है.
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