'अब कोई बचाने नहीं आएगा, पक्षपाती पुलिसकर्मी...', अनुज चौधरी पर FIR के आदेश के बाद बोले अखिलेश यादव

संभल हिंसा मामले में कोर्ट द्वारा एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर के आदेश के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर सरकार और पुलिस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा पहले इस्तेमाल करती है, फिर छोड़ देती है. उन्होंने कोर्ट के आदेश को अवैध बताए जाने पर सवाल उठाया और चेताया कि सत्ता की चापलूसी करना पुलिस अधिकारियों को भारी पड़ सकता है.

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कोर्ट ने अनुज चौधरी पर FIR का आदेश दिया है. (Photo: ITG) कोर्ट ने अनुज चौधरी पर FIR का आदेश दिया है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:09 PM IST

उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले को लेकर सियासत और कानूनी हलचल तेज हो गई है. संभल के तात्कालीन सर्कल ऑफिसर और वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज किए जाने के निर्देश के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और पुलिस पर तीखा तंज कसा है.

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “अब कोई बचाने नहीं आएगा… अब ये पक्षपाती पुलिसकर्मी अकेले में खाली बैठकर याद करेंगे. भाजपा का फ़ार्मूला नंबर 1: पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो. भाजपा का फ़ार्मूला नंबर 2: भाजपाई किसी के सगे नहीं हैं.”

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'सत्ता की चापलूसी दारोगा जी को महंगा न पड़े'
उन्होंने आगे कहा कि अब पुलिस के बड़े अधिकारी कोर्ट के आदेश को अवैध बता रहे हैं. सवाल उठता है कि क्या इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा? सत्ता की चापलूसी के चक्कर में ज़्यादा दरोगाई दिखाना कहीं महंगा न पड़ जाए.


 

 

पीड़ित पक्ष के वकील का पक्ष
पीड़ित के वकील कमर हुसैन ने बताया कि आलम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ‘पापे’ यानी रस्क बेचकर गुजर-बसर करता था. हिंसा वाले दिन इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा थे और वह अपनी ठेली लेकर वहां पहुंचा था. उसी दौरान पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें आलम गोली का शिकार हो गया. इसके बाद वह जान बचाकर वहां से निकल गया और इलाज के लिए कई अस्पतालों में गया, लेकिन कहीं भी उसका इलाज नहीं किया गया.

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एसपी पर लापरवाही का आरोप
वकील के अनुसार, आलम के पिता ने पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी थी, लेकिन इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया. कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष ने CJM कोर्ट में याचिका दाखिल की. सुनवाई और तथ्यों की जांच के बाद अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया.

घटना के वक्त कई पुलिसकर्मी थे तैनात
कमर हुसैन ने बताया कि घटना के समय तत्कालीन सर्कल ऑफिसर अनुज चौधरी और अमित तोमर मौके पर मौजूद थे. इनके अलावा करीब 15 से 20 अन्य पुलिसकर्मी भी वहां थे. कोर्ट ने सभी संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.

वकील ने साफ कहा कि यह न्यायालय का आदेश है और पुलिस को इसका पालन करना ही होगा. अगर आदेश लागू नहीं किया गया, तो पीड़ित पक्ष हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराएगा.

एसपी का बयान
अदालत के आदेश के बाद संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मौखिक रूप से कहा कि फिलहाल एएसपी अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस आदेश को चुनौती देते हुए अदालत में अपील की जाएगी. एसपी का यह भी कहना है कि संभल हिंसा मामले में पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है और जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आदेश दिया गया है, उनकी जांच पूरी की जा चुकी है.

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