सिंगापुर की एक अदालत ने 97 साल के एक व्यक्ति को शादी के लिए मानसिक रूप से फिट घोषित किया है. इस खबर की काफी चर्चा है. क्योंकि, बुजुर्ग ने अपने बेटे के खिलाफ मुकदमा जीतकर अपनी प्रेमिका से शादी करने का अधिकार हासिल किया. जब उसके बेटे ने उसे उस महिला से शादी करने से रोकने की कोशिश की, जिसके साथ वह कई दशकों से संबंध में थे.
यह विचित्र कहानी एक ऐसे शख्स की है, जिसकी पहली शादी 1950 में की थी. पत्नी के निधन के बाद वह एक दूसरी महिला के संपर्क में आया और कई साल रिश्ते में रहने के बाद 97 साल की उम्र में उससे शादी करने का फैसला किया. लेकिन, यहां एक अड़चन थी. बुजुर्ग के शादी के रास्ते में उनके बेटे बाधा बन रहे थे. बेटों ने पिता के फैसले के खिलाफ कोर्ट में केस कर दिया. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी.
ऑडिटरी सेंट्रल के मुताबिक, इस शख्स की पहली शादी 1950 में हुई थी. अपनी पत्नी से तीन बेटे हुए. 1971 में, उनका अपनी सचिव के साथ प्रेम संबंध शुरू हुआ और उनसे एक और बच्चा भी हुआ. बताया जाता है कि उनकी पत्नी को उनकी प्रेमिका के बारे में पता था. 2014 में पत्नी की मृत्यु तक वह उनके साथ रहे. जब पत्नी का देहांत हो गया तो बुजुर्ग अपनी प्रेमिका को अपने साथ रहने के लिए ले आए.
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2021 में जब उन्होंने उस महिला से शादी करने की घोषणा की, तो उनके परिवार के साथ विवाद चरम पर पहुंच गया. अपने बुजुर्ग पिता के पुनर्विवाह की योजना की खबर सुनकर, उनके दूसरे बेटे ने पारिवारिक अदालत में याचिका दायर कर अपने पिता को कानूनी रूप से अक्षम घोषित करने का अनुरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 में गिरने के बाद उनके पिता को डिमेंशिया हो गया था, वे अब निर्णय लेने में सक्षम नहीं थे और उनकी प्रेमिका उन्हें बहका रही है.
केमिकल फैक्ट्री के मालिक हैं बुजुर्ग
इस शख्स के पास 1960 के दशक में स्थापित एक केमिकल कंपनी का स्वामित्व है. बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी वसीयत में संशोधन करके अपने दूसरे बेटे और पोते को वसीयत से बाहर कर दिया और 38 लाख सिंगापुर डॉलर (29 लाख डॉलर) और कंपनी की संपत्ति की वापसी की मांग करते हुए एक जवाबी मुकदमा दायर किया. उन्होंने मुकदमे के प्रतिशोध में अपने पोते को उसके घर से बेदखल करने की भी कोशिश की.
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चिकित्सकीय साक्ष्यों से पता चला कि वृद्ध व्यक्ति में उम्र के कारण हल्की संज्ञानात्मक गिरावट और अल्पकालिक स्मृति हानि थी, लेकिन वह विवाह और संपत्ति संबंधी निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम थे. ऑडियो रिकॉर्डिंग से पता चला कि वह होश में थे और अपने कार्यों के प्रति पूरी तरह सचेत थे.जज शोभा नायर ने यह भी बताया कि 97 साल के इस व्यक्ति के डिमेंशिया के बारे में उनके दावों के बावजूद, उनके बेटे ने 2019 में कंपनी के सीईओ के रूप में अपने पिता की नियुक्ति को मंजूरी दे दी, उस दुर्घटना के दो साल बाद जिसने कथित तौर पर उन्हें अक्षम बना दिया था.
कोर्ट ने बेटे की अर्जी को किया खारिज
अदालत ने दूसरे बेटे के मुकदमे को खारिज कर दिया, और कहा कि 97 साल के व्यक्ति 50 वर्षों से उसी महिला के साथ संबंध में थे और ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे यह पता चले कि महिला ने उसकी संपत्ति हड़पने के लिए उसे धोखा दिया या उसका शोषण किया. उस व्यक्ति के दूसरे बेटे ने पहले ही अपील दायर कर दी है, इसलिए 97 साल के शख्स को दोबारा शादी करने के लिए अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ेगा.
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