कर्नाटक में तंबाकू के खिलाफ महिलाओं का जोरदार एक्शन, बसों से फाड़े गुटखा विज्ञापन

कर्नाटक में महिलाओं ने तंबाकू विरोधी अभियान के तहत सरकारी बसों से गुटखा और पान मसाला से जुड़े विज्ञापन फाड़ दिए. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महिलाएं बसों से बड़े पोस्टर हटाती नजर आ रही हैं. लोगों का कहना है कि ऐसे विज्ञापन अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू को बढ़ावा देते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं.

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राज्य सरकार ने भी बसों और बस स्टैंड से तंबाकू से जुड़े विज्ञापन हटाने का आदेश दिया है. ( Photo: X/@@Khurpenchinfra) राज्य सरकार ने भी बसों और बस स्टैंड से तंबाकू से जुड़े विज्ञापन हटाने का आदेश दिया है. ( Photo: X/@@Khurpenchinfra)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

 

कर्नाटक में इन दिनों तंबाकू के खिलाफ एक अलग तरह का आंदोलन देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं सरकारी बसों पर लगे गुटखा और तंबाकू के विज्ञापन फाड़ती नजर आ रही हैं.

क्या है पूरा मामला?
वीडियो में महिलाएं राज्य परिवहन की बसों के किनारों पर चिपकाए गए बड़े-बड़े पोस्टर उतारती दिखती हैं. इन पोस्टरों में पान मसाला या इलायची जैसे उत्पादों के नाम से तंबाकू का अप्रत्यक्ष प्रचार किया जा रहा था. लोगों का कहना है कि ऐसे विज्ञापन युवाओं को तंबाकू की ओर आकर्षित करते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं.

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पहले भी शुरू हुआ था विरोध
इस अभियान की शुरुआत जनवरी में हुई थी, जब कुछ युवाओं ने कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) और बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (BMTC) की बसों से ऐसे विज्ञापन हटाए थे. उनके वीडियो भी वायरल हुए थे. अब महिलाओं के जुड़ने से यह आंदोलन और बड़ा हो गया है.

क्यों हो रहा है विरोध?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का सीधा या परोक्ष (अप्रत्यक्ष) विज्ञापन कानून के खिलाफ है. कई कंपनियां “इलायची” या “पान मसाला” के नाम पर तंबाकू का प्रचार करती हैं, जिससे लोग भ्रमित हो सकते हैं. इसी कारण जनता में नाराजगी बढ़ रही थी.

सरकार ने क्या कहा?
कर्नाटक के परिवहन मंत्री ने निर्देश दिया है कि बसों और बस स्टैंड पर तंबाकू से जुड़े किसी भी तरह के विज्ञापन नहीं लगाए जाएं. पुराने विज्ञापनों को हटाने के लिए भी समय सीमा तय की गई है.

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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
लोग इस पहल की तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने इसे “बहुत बढ़िया कदम” और “शानदार पहल” बताया. यह मामला दिखाता है कि जब आम लोग मिलकर आवाज उठाते हैं, तो वह जन स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर बड़ा असर डाल सकता है.

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