3500 सालों से बार- बार बचाया अपना अस्तित्व, यहूदियों की हिम्मत की निशानी है ये सिनेगॉग

जेरूसलम का सिनेगॉग यहूदियों का पूजा स्थल होता है. इस सिनेगॉग को उस शेप में बनाया गया है जिस शेप में यहूदियों का पहला 3500 साल पुराना मंदिर हुआ करता था और जिसको उस टाइम Babylonian यानी कसदी साम्राज्य ने डिस्ट्रॉय कर दिया था.

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फोटो- wikimedia commons फोटो- wikimedia commons

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:06 PM IST

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के लड़ाकों ने बीते 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमले के दौरान लगभग 240 लोगों को बंधक बना लिया था. इस हमले में 1400 लोगों की मौत हो गई थी. इसके जवाब में इजरायल ने गाजा पर हमला किया, जिसमें हजारों लोग मारे गए. ये युद्ध अभी थमा नहीं है और इस समय इजरायल और हमास के बीच बीते सात दिनों का अस्थाई सीजफायर खत्म होने के बाद एक बार फिर से बमबारी शुरू हो गई है. इजरायली सेना आईडीएफ ने सीजफायर खत्म होने के घंटेभर के भीतर गाजा पर भीषण बमबारी शुरू कर दी, जिसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है.

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फिलिस्तीन और इजरायल के विवाद की बात करें तो दुनियाभर के देश अलग- अलग पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं. बीते दिनों भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के खिलाफ जारी प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है.  इस सब के बीच आज तक के संवाददाता राजेश पंवार इजरायल के जेरूसलम पहुंचे. यहां उन्होंने बताया कि कैसे एक बार फिर युद्ध के हालातों को देख रहे यहूदियों ने सदियों से अपने अस्तित्व को बचाने के लिए ऐड़ी चोटी लगाई है.

राजेश पंवार जेरूसलम के एक सिनेगॉग के पास पहुंचे. उन्होंने बताया कि सिनेगॉग यहूदियों का पूजा स्थल होता है. इस सिनेगॉग को उस शेप में बनाया गया है जिस शेप में यहूदियों का पहला 3500 साल पुराना मंदिर हुआ करता था और जिसको उस टाइम Babylonian यानी कसदी साम्राज्य ने डिस्ट्रॉय कर दिया था.उसके ऊपर फिर यहूदियों ने दूसरा मंदिर बनाया जिसको आज से लगभग दो हजार साल पहले रोमन ने तबाह कर दिया था.

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अब वहां सिर्फ एक दीवार है और अब भी यहूदी उसकी बची हुई दीवार पर जाते हैं और अपने दूसरी बार तोड़े गए मंदिर के लिए रोते हैं. इसीलिए उसे वॉल ऑफ वेलिंग कहते हैं. अब वे इसके एक बार फिर से तैयार हो जाने की कामना करते हैं.  

जेरूसलम एक बड़ा शहर है इसलिए मंदिर की तबाही के बाद बने सिनोगॉग की क्षमता 1400 लोगों तक है. ये शुक्रवार की शाम को खचाखच भरा होता है. इसे 1923 से बनाने की कोशिश की जा रही थी और यह 1982 में जाकर तैयार हुआ.

इस सिनेगॉग की दीवार पर लिखा है कि ये सिनेगॉग इजरायल की रक्षा में शहीद हुए 60 लाख यहूदियों की याद में बनाया गया है. बता दें कि एक समय यहूदियों की भाषा हिब्रू भी उनके मंदिर की तरह लगभग खत्म हो गई थी लेकिन यहां के लोगों ने उसे पुनर्जीवित किया और आज जेरूसलम के बच्चा- बच्चा हिब्रू बोलता है.

यही वजह है कि ये सिनेगॉग कहीं न कहीं इजराइल की आत्मा को दर्शाता है कि किस तरह से इजरायल को बार- बार दबाया गया और खत्म करने की कोशिश की गई थी.लेकिन इसके बावजूद यहां के यहूदी वापस खड़े हुए और अपने अस्तित्व को बचाया. 

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इनपुट- राजेश पंवार 

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