अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखने वाले एक भारतीय परिवार के लिए यह सपना भारी कर्ज और चिंता में बदल गया. अपने दोनों बेटों को अमेरिका भेजने के लिए एक पिता ने करीब 2 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया, लेकिन सख्त वीजा नियमों के कारण बच्चों को नौकरी नहीं मिल पाई. यह कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आदित्य नाम के एक यूजर ने शेयर की है. उन्होंने बताया कि उनके एक करीबी दोस्त ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने दोनों बेटों को महंगे मास्टर डिग्री कोर्स के लिए अमेरिका भेज दिया.
पढ़ाई पूरी, लेकिन नौकरी नहीं
पढ़ाई पूरी होने तक पिता पर करीब 1.5 करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका था. आमतौर पर ऐसी डिग्री के बाद छात्र H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में नौकरी की उम्मीद करते हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में आव्रजन नियमों की सख्ती के कारण हालात बदल गए. डिग्री मिलने के बाद दोनों बेटे नौकरी के लिए संघर्ष करते रहे. इस दौरान पिता भारत से लगातार पैसे भेजते रहे ताकि बच्चे अमेरिका में रह सकें.
हर महीने लाखों रुपये भेजने पड़े
आदित्य के मुताबिक, पहले पिता हर बेटे को करीब 1 लाख रुपये महीने भेजते थे. बाद में नियम सख्त होने और हालात बिगड़ने पर यह रकम बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रति माह कर दी गई. इसी दौरान कुल कर्ज बढ़कर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया.
फ्लैट बेचने तक की नौबत
बच्चों की पढ़ाई और रहने का खर्च उठाने के लिए पिता अपना फ्लैट बेचने तक को तैयार हो गए थे. भारत में उनका कारोबार भी ठीक नहीं चल रहा था, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया. काफी समय बाद परिवार को थोड़ी राहत तब मिली जब बड़े बेटे का नाम H-1B वीजा लॉटरी में निकल गया. उसे अमेरिका में नौकरी मिल गई. भले ही उसकी सैलरी ज्यादा नहीं है, लेकिन अब वह अपने खर्च खुद उठा सकता है.
हजारों परिवार ऐसी ही स्थिति में
आदित्य ने इसे भयावह स्थिति बताते हुए कहा कि आज हजारों भारतीय छात्र और उनके माता-पिता इसी हालात से गुजर रहे हैं. उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि अगर आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, तो बच्चों को अमेरिका भेजने का फैसला सोच-समझकर लें. साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे मामलों में आलोचना करने के बजाय सहानुभूति दिखाएं, क्योंकि युवा छात्र कम नौकरियों वाले बाजार और बढ़ते पारिवारिक कर्ज के बीच फंसे हुए हैं.
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