आज के डिजिटल युग में जहां मोबाइल और इंटरनेट बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं उनकी ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे समय में गूगल की एक पॉलिसी को लेकर उठे सवालों ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. एक मां का आरोप है कि गूगल बच्चों को सीधे ईमेल भेजकर उन्हें माता-पिता की निगरानी से बाहर आने के लिए प्रेरित कर रहा है. इस मुद्दे ने न सिर्फ पेरेंट्स को नाराज किया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के फैसले आखिर किसके हाथ में होने चाहिए-माता-पिता के या बड़ी टेक कंपनियों के?
बच्चे हटा सकते हैं पेरेंट्स कंट्रोल
आज के डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर माता-पिता पहले से ही काफी परेशान रहते हैं. ऐसे में गूगल की एक पॉलिसी एक मां का गुस्सा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. इस पॉलिसी के तहत बच्चों को अपने गूगल अकाउंट से माता-पिता की निगरानी हटाने का विकल्प दिया जा रहा है, जिसे कई लोग गलत और खतरनाक मान रहे हैं. डिजिटल चाइल्डहुड इंस्टीट्यूट की अध्यक्ष मेलिसा मैके ने गूगल पर गंभीर आरोप लगाए हैं.उन्होंने बताया कि गूगल ने उनके 13 साल से कम उम्र के बच्चे को ईमेल भेजा, जिसमें लिखा था कि वह अब 'काफी बड़ा' हो गया है और अपने अकाउंट से पैरेंटल कंट्रोल हटा सकता है.
पेरेंट्स ने उठाया ये सवाल
मेलिसा मैके ने इस ईमेल के स्क्रीनशॉट लिंक्डइन पर शेयर किए और कहा कि यह कदम माता-पिता के अधिकारों को कमजोर करता है. ईमेल में साफ लिखा था कि 13 साल या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे बिना माता-पिता की अनुमति के अपने अकाउंट की पूरी जिम्मेदारी खुद ले सकते हैं और निगरानी बंद कर सकते हैं. मैके ने इसे 'नाबालिगों का शोषण' बताया और कहा कि एक बड़ी टेक कंपनी बच्चों से सीधे संपर्क कर रही है और उन्हें माता-पिता से दूर करने की कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े फैसले कंपनियों को नहीं, बल्कि माता-पिता को लेने चाहिए.
सोशल मीडिया पर दिखा लोगों का गुस्सा
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा देखने को मिला. कई माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चों को भी ऐसे ही ईमेल मिले हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मैसेज मिलने से बच्चों को लगता है कि वे अचानक बड़े हो गए हैं, जिससे घर में बहस और तनाव बढ़ जाता है. कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि सिर्फ गूगल ही नहीं, बल्कि दूसरी टेक कंपनियां भी बच्चों को इसी तरह के संदेश भेज रही हैं। लोगों का मानना है कि 13 साल के बच्चे इतने समझदार नहीं होते कि वे खुद तय कर सकें कि पैरेंटल कंट्रोल हटाना सही है या नहीं. कुल मिलाकर, यह मामला बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, माता-पिता के अधिकार और बड़ी टेक कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है.
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