दलित जोड़े ने अंबेडकर की प्रतिमा को साक्षी मानकर रचाई शादी

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के एक दलित जोड़े ने अंबेडकर की मूर्ति को साक्षी मानकर अपनी नई जिंदगी की तरफ कदम बढ़ाए हैं. घर की माली हालत देखते हुए गांव वालों ने भी इसकी स्वीकृति दे दी.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

केशवानंद धर दुबे

  • सीहोर,
  • 05 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

अग्नि को साक्षी मानकर, सात फेरे लेकर, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शादियों को तो हम सबने देखा है. लेकिन पहली बार मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के एक दलित जोड़े ने अंबेडकर की मूर्ति को साक्षी मानकर अपनी नई जिंदगी की तरफ कदम बढ़ाए हैं.

दरअसल वर और वधू, दोनों ही पक्ष शादी का खर्च उठाने में खुद को असमर्थ मान रहे थे. ऐसे में उन्होंने परिजनों के सामने एक प्रस्ताव रखा. उन्होंने दलितों के मसीहा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के सामने एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला किया. घर की माली हालत देखते हुए गांव वालों ने भी इसकी स्वीकृति दे दी.

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25 वर्षीय पंकज कहते हैं, 'शादी दिलों का रिश्ता है इसलिए हमने चमक-धमक में पैसे न बर्बाद करते हुआ ये फैसला लिया. हमें बेहद खुशी है कि लोगों ने हमारा साथ दिया.'

परिवार ने बड़ी मुश्किल से दावत का इंतजाम किया. पंकज के पिता ने अपने परिजनों को धन्यवाद कहते हुए कहा कि मैं अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने आगे बढ़कर हमारी मदद की.

 

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