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गेस्ट टीचर ने कराया मुंडन तो रोने लगे साथी, 72 द‍िनों से धरने पर

रवीश पाल सिंह
  • 20 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 9:10 AM IST
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भारतीय समाज और संस्कृति में महिलाओं का मुंडन बेहद दुखद और मार्मिक समझा जाता है लेकिन अगर यही महिलाएं अपना मुंडन सरकार की वादा खिलाफी के चलते कराएं तो राजनीति का शर्मनाक चेहरा सामने आता है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले 72 दिनों से सरकार को नियमितीकरण का वादा याद दिलाने के लिए धरने पर बैठे अतिथि शिक्षक ने तमाम रोती हुई महिलाओं के बीच अपना मुंडन कराया. इस दौरान 72 दिनों से धरने पर बैठी सभी महिलाओं की आंखें नम थी.

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बालों को मुंडाते हुई यह महिला और उसे देखकर रोती हुई तमाम महिलाओं का यह दृश्य राजा राममोहन राय के जमाने का नजर आ रहा होगा जब पति की मृत्यु के बाद महिलाओं का मुंडन किया जाता था. अब 21वीं सदी है, भारत में लोकतंत्र हैं और तस्वीरों में आज भी वैसा ही दृश्य है, जब महिला समाज के दबाव में नहीं बल्कि सरकार की वादा खिलाफी के चलते मुंडन करवा रही है.

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मध्य प्रदेश की सियासी जमीन पर 15 सालों से बेघर रही कांग्रेस. मौका था विधानसभा चुनाव का. उन्हें उन सबसे से वोट चाह‍िए थे जो बीजेपी सरकार से नाराज थे. ऐसे में कांग्रेस ने और उस वक्त के अध्यक्ष कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पढ़ाने वाले अतिथि विद्वानों को वादा किया था क‍ि सरकार में आएंगे तो नौकरी को नियमित किया जाएगा.

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ऐसे में चुनाव के दौरान अतिथि विद्वानों ने उनके परिवार और समर्थकों ने जमकर कांग्रेस के पक्ष में वोट किया. उम्मीद थी सरकार आएगी नियमित होंगे. सरकार भी आई, साल भर बीत गया. न नियमतिकरण हुआ बल्कि सरकार ने अतिथि विद्वानों को नौकरी से निकालना शुरू कर दिया. नतीजे में अतिथि विद्वान सरकार को वादा खिलाफी याद दिलाने के लिए 72 दिनों से भोपाल में बैठे रहे. जब सरकार को उनकी आवाज नहीं सुनाई दी तो मजबूर हो गई महिला मुंडन के लिए. यह देख तमाम अतिथि महिला विद्वान रोते नजर आई.

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दरअसल, अतिथि विद्वान नियमितीकरण की मांग को लेकर 72 दिन से राजधानी भोपाल में धरने पर बैठे हैं. इनमें से कइयों ने अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी अपने साथ रखा है. इस ठंड में लगातार धरना देने से कई की तबीयत खराब हो चुकी है. एक अतिथि विद्वान की जहां धरना स्थल से जाने के बाद मौत भी हो चुकी है, तो वहीं दो हफ्ते पहले छतरपुर के अतिथि शिक्षक संजय कुमार ने नियमितीकरण न होने के गम में आत्महत्या कर ली.

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इन अतिथि विद्वानों को कांग्रेस ने चुनाव के वक्त वचन दिया था कि सरकार बनने पर उन्हें नियमित किया जाएगा. साल भर बीत जाने के बाद भी उन्हें नियमित तो नहीं किया गया, उल्टा 2700 अतिथि विद्वानों को फालेन आउट के नोटिस जरूर जारी कर दिये गए. अब अतिथि विद्वान संघ के अध्यक्ष कहते हैं. हम मुंडन कराई महिला के बाल राहुल गांधी को भेजेंगे ताकि उनकी सरकार को वादा याद आए.

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वहीं बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तंज कसते नजर आई. बीजेपी ने कहा क‍ि महिलाओं के लिए केश त्यागने का मतलब है उसका सब कुछ खत्म हो गया. अतिथि विद्वान का मुंडन पूरे प्रदेश की महिलाओं का अपमान है, इसका खामियाजा सरकार को भुगतना होगा.

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