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कोरोना: बच्चों को नहीं मिल रहा खाना, भूख और डर के साये में जिंदगी

aajtak.in
  • 21 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST
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फिलहाल पूरा देश कोरोना वायरस से लड़ रहा है. देश की स्थिति काफी भयावह होती जा रही है. हर दिन कोरोना का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. देश में रोज कोई न कोई कोरोना वायरस से ग्रसित होने के संदेह में अस्पताल में भर्ती हो रहा है. इस बीच दूसरी तस्वीर भी सामने आई है. जहां सिलीगुड़ी के चाय बागान इलाकों में रहने वाले बच्चों को खाना नहीं मिल पा रहा है. बच्चे आधा पेट खाना खाकर अपना दिन बिताने पर मजबूर हैं. (Photo-Reuters)

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बच्चों का पेट भरने के लिए चाय बागान के श्रमिकों को काफी समस्या का सामना करना पढ़ रहा है. उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के चलते बंगाल सरकार ने लोगों को कुछ नए निर्देश दिए है. इसके तहत कुछ समय के लिए आईसीडीएस सेंटर, प्राथमिक स्कूल, आंगनबाड़ी, कॉलेज को बंद रखने का निर्देश दिए हैं जिसकी वजह से मजदूरों के बच्चों को मिड डे मील मिल नहीं पा रहा है. (Photo-Reuters)


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वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना था कि आंगनबाड़ी, आईसीडीएस केन्द्र, प्राथमिक स्कूल से जिन जरूरतमंद बच्चों को मिड-डे मील मिलता है उनको वह मिलता रहेगा. जिसके लिए बच्चों के घर तक मिड-डे मील पहुंचाने की व्यवस्था कराई जाएगी, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्कूल, आईसीडीएस सेंटर सब बंद हो गए हैं जिसकी वजह से बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिल पा रहा है. (Photo-Reuters)

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स्कूल, आईसीडीएस सेंटर बंद होने से बागान इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा समस्याओं का समना करना पड़ रहा है. चाय बागान के श्रमिक दिन भर मजदूरी करके किसी तरह से अपने परिवार को आधा पेट भोजन उपलब्ध करवा पाते हैं. वहीं अपने छोटे-छोटे बच्चों को भर पेट पौष्टिक भोजन देने में असमर्थ हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

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बता दें राज्य सरकार ने गरीब जरूरतमंद बच्चों को पौष्टिक भोजन देने लिए मिड-डे मील शुरू किया. जिसके तहत गरीब जरूरतमंद बच्चों को सप्ताह में प्रत्येक दिन अलग-अलग पौष्टिक भोजन दिया जाता है. जिसमें मांस से लेकर मछली, अंडा, सब्जी आदि शामिल है. मजदूरों का कहना है, 'स्कूल, आईसीडीएस सेंटर बंद होने से पहले सब मिलता था, लेकिन राज्य सरकार के निर्देश के बाद वह सब बंद हो गया.' (प्रतीकात्मक फोटो)

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साथ ही बागान श्रमिकों ने बताया, 'कोरोना वायरस महामारी के कारण सभी स्कूल बंद हो गए हैं. दैनिक मजदूरी से हम लोगों की इतनी हैसियत नहीं कि हम अपने बच्चों को भर पेट पौष्टिक भोजन दे सकें. जब स्कूल खुला था तब बच्चों की पढ़ाई भी होती थी और एक वक्त का भोजन भी बच्चों को मिल जाता था, लेकिन कुछ दिनों से वह सब बंद है. श्रमिक अब सिर्फ इंतजार कर रहे है कि कब कोरोना वायरस का आतंक कम होगा और बच्चों को सरकारी मीडे मिल मिलेगा. (प्रतीकात्मक फोटो)
 

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