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28 साल से राम मंदिर के लिए त्याग रखा अन्न, भूमि पूजन के बाद ये कहा

धीरज शाह
  • 05 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST
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भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के लिए लाखों लोगों ने सहभागिता दी जिनमें कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने मन ही मन राम मंदिर निर्माण का संकल्प ले लिया और तपस्या की. उनमें से एक हैं जबलपुर की उर्मिला चतुर्वेदी, जो पिछले 28 साल से लगातार अन्न त्यागकर व्रत कर रही हैं. आज देशभर में ये रामभक्त शबरी के रूप में पहचान बना चुकी हैं. कलयुग की शबरी उर्मिला चतुर्वेदी का संकल्प अब 28 साल बाद पूरा होने जा रहा है.

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जबलपुर की रहने वाली 82 साल की उर्मिला चतुर्वेदी ने भगवान के लिए समर्पण की अनोखी मिसाल कायम की है. जिस तरह भगवान श्रीराम के लिए शबरी ने तपस्या की थी उसी तरह इन्होंने भी 28 साल भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण के लिए कठिन तपस्या की है. यही वजह है इन्हें अब कलयुग की शबरी कहा जा रहा है.

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82 साल की उर्मिला चतुर्वेदी आज भले ही उम्र के इस पड़ाव में आकर कमजोर नजर आ रही हैं लेकिन इनका संकल्प बेहद मजबूत है. पिछले 28 साल से केवल इसलिए उपवास किया क्योंकि वे अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनते हुए देखना चाहती थीं. इनके संकल्प की कहानी भी लंबी है.

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साल 1992 में जब कारसेवकों ने राम जन्मभूमि पर बने बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराया और वहां खूनी संघर्ष हुआ तब उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम शुरू न हो जाए, तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगी.

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राजनीतिक इच्छाशक्ति से इतर उर्मिला चतुर्वेदी का संकल्प इतना मजबूत था कि उन्होंने 1992 के बाद खाना नहीं खाया और सिर्फ फलाहार से ही जिंदा रहीं. वे पिछले 28 साल से इंतजार कर रही थी कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो.

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जबलपुर के विजय नगर इलाके की रहने वाली उर्मिला चतुर्वेदी की उम्र तकरीबन 82 साल हैं. विवादित ढांचा टूटने के दौरान देश में दंगे और खून-खराबा हुआ. हिंदू-मुस्लिम भाईयों ने एक दूसरे का खून बहाया तो ये सब नजारा देखकर उर्मिला चतुर्वेदी बेहद दुखी हुईं और उस दिन उन्होंने संकल्प ले लिया कि अब वह अनाज तभी खाएंगी, जब देश में भाईचारे के साथ अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा.

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उर्मिला को राम मंदिर के भूमि पूजन में न पहुंच पाने का अफसोस जरूर है लेकिन उन्होंने टीवी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए भूमि पूजन का सीधा प्रसारण देखते हुए महसूस किया कि जैसे वे खुद भी अयोध्या में हों और अपनी आंखों के सामने मंदिर निर्माण का भूमि पूजन देख रही हैं.

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28 साल से राम मंदिर निर्माण का सपना देख रहीं उर्मिला ने अभी भी अपना व्रत नहीं खोला है. उनकी इच्छा है कि वे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद वहां पहुंचे और सरयू नदी में स्नान करके भगवान राम का पूजन करें और वहां जो प्रसाद वितरण होता है उससे अपना उपवास खोलें.

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