निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया गया. 2012 में राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड में करीब सवा सात साल के बाद इंसाफ हुआ है. इसकी खुशी देशभर में देखी जा रही है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के बनारस में दुकान पर मुफ्त में पान बांटा जा रहा है.
दरअसल, बनारस में पान की दुकान पर 'निर्भया पान- फ्री फॉर लेडीज' का बोर्ड लगाकर पान दिया जा रहा है. यहां महिलाओं और लड़कियों मुफ्त में पान बांटा जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि बड़ी मात्रा में महिलाएं और लड़कियां पान खाने पहुंच रही हैं.
दुकान पर पान खाने के लिए होड़ लगी हुई है. दुकान पर पहुंची लड़कियां दुकान पर पान खा रही हैं और आपस में बात भी कर रही हैं. वे निर्भया के केस के भी बारे में बात कर रही हैं.
ऐसा
माना जा रहा है कि निर्भया के सम्मान में बनारस में फ्री पान बांटा जा रहा
है. ताकि लोगों के बीच निर्भया के इंसाफ का संदेश दिया जा सके.
इससे
पहले भी देश के कई हिस्सों में निर्भया के इंसाफ की खबर मिलने के बाद खुशी
की लहर देखी गई. लोगों ने इसका स्वागत भी किया और कहा कि अब सात साल बाद
निर्भया को इंसाफ मिल गया है.
वहीं जब सुबह निर्भया केस के चारों दोषियों को फांसी दी गई तो तिहाड़ जेल के बाहर भी लोगों ने आपस में मिठाई बांटी. काफी लोग तो रात में ही तिहाड़ के बाहर पहुंच चुके थे.
बता दें कि सात साल के लंबे इंतजार के बाद 20 मार्च, 2020 की सुबह 5:30 बजे
निर्भया के चारों दोषियों को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई.
जहां एक ओर दोषियों के वकील ने उन्हें बचाने के लिए हर दांव अपनाया, तो
वहीं निर्भया के परिवार और वकील ने जबरदस्त लड़ाई हुए निर्भया को इंसाफ
दिलाया.
16 दिसंबर 2012 को हुई थी घटना:
16 दिसंबर 2012 की
रात को एक वीभत्स वारदात में देश की राजधानी दिल्ली के मुनिरका में 6 लोगों
ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से गैंगरेप किया. इस मामले में
दरिंदगी की वो सारी हदें पार की गईं, जिसे देखकर-सुनकर कोई दरिंदा भी दहशत
में आ जाए. वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था. दोषियों ने उसके
साथ भी मारपीट की थी. इसके बाद युवती और दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक
दिया था.
पीड़िता का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था,
लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे सिंगापुर भेजा गया. वहां अस्पताल
में इलाज के दौरान 29 दिसंबर को पीड़िता जिंदगी की जंग हार गई. पीड़िता की
मां ने बताया था कि वह आखिरी दम तक जीना चाहती थी.
निर्भया के
दोषियों को सजा दिलाने की लड़ाई दिल्ली की अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक
होती रही. अदालती सुनवाइयों के दौरान ही निर्भया के एक दोषी ने जेल में ही
आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद भी बाकी के चारों दोषियों ने कई बार कानूनी
दांव-पेच खेले, कभी स्थानीय अदालत में याचिका तो कभी सुप्रीम कोर्ट में
याचिका डाली. कई बार फांसी टली भी लेकिन आखिरकार शुक्रवार को चारों दोषियों
को फांसी पर लटका दिया गया.