भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नजरें इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप फाइनल जीतकर पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने पर हैं. भारत की महिला टीम की कप्तान मिताली अपना पांचवां वर्ल्ड कप खेल रहीं हैं. 34 साल की मिताली पिछले 12 साल से टीम इंडिया की कप्तान हैं.
मिताली का जन्म एक तमिल परिवार में हुआ था. इसके चलते उन्होंने बचपन में ही क्लासिकल डांस सीखना शुरू कर दिया. 10 साल की उम्र तक मिताली भरतनाट्यम में पारंगत हो गईं थीं. वे इसी में करियर बनाने के बारे में सोचने लगीं थीं.
मिताली बचपन से आलसी थी. पिता चाहते थे कि बेटी एक्टिव बने. इसलिए उन्होंने उसे क्रिकेट खेलने को कहा. 10 साल की उम्र में मिताली क्लासिकल डांस छोड़ हाथ में बैट पकड़े मैदान में नजर आने लगीं थीं.
दरअसल उनकी डांस टीचर ने मिताली को क्रिकेट और डांस में से एक चुनने की सलाह दी थी. मिताली की मां क्रिकेट खेल चुके हैं. उनके माता- पिता ने उन्हें काफी सपोर्ट किया. मिताली की मां ने उनके लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी थी.
स्कूल में मिताली लड़कों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करती 17 साल की उम्र में मिताली का चयन भारतीय टीम में हो गया. एक इंटरव्यू में मिताली ने बताया था कि वह कुछ सालों पहले तक रिलेशनशिप में थी. लेकिन ब्रेकअप के बाद वह अब क्रिकेट में फोकस करना चाहती हैं.
मिताली के मुताबिक शुरुआत में मैंने सिर्फ पेरेंट्स की खुशी के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया था. मेरा पहला प्यार तो भरतनाट्यम ही था. एक बार मैंने सिविल सर्विस में भी करियर बनाने का सोचा था.
मिताली पहली महिला क्रिकेटर हैं, जिन्हें विजडन इंडिया क्रिकेटर अवॉर्ड मिला है. उन्हें 21 साल की उम्र में भारतीय टीम की कमान सौंप दी गई थी. मिताली के नाम अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में सबसे बड़े हाईएस्ट स्कोर का रिकॉर्ड है. उन्होंने साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ 214 रन की पारी खेली थी.
मिताली किताबें पढ़ने की शौकीन हैं. वे हर मैच में बैटिंग करने जाने से पहले किताब पढ़ते हुए अपनी बारी का इंतजार करतीं हैं. उन्हें हाल ही में वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में भी ऐसा करते हुए देखा गया.
मिताली साढ़े पांच हजार रन बनाने वाली दूसरी महिला क्रिकेटर हैं. वे 2013 में दुनिया की नंबर वन वनडे क्रिकेटर थीं. मिताली को खेल में अच्छे प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है.
2005 में जब भारतीय टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची थी, उस समय मिताली टाइफाइड के कारण फाइनल नहीं खेल सकीं थीं. टीम मैच हार गई थी. इसके बाद टीम कभी फाइनल में जगह नहीं बना सकी है.