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कोरोना के इलाज पर काम, मरीजों के खून से ही दवा बना रही कंपनी

aajtak.in
  • 08 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 3:52 PM IST
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कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं. ऐसे मरीज वायरस से संक्रमित होने के बाद अपने शरीर में इम्यून सिस्टम डेवलप कर लेते हैं. इसकी वजह से अब कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज के खून का इस्तेमाल कर दूसरे मरीजों को ठीक करने के लिए दवा बनाई जा रही है.

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डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, साइंटिस्ट्स कोरोना वायरस से ठीक हो चुके मरीजों के खून से ही कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के करीब पहुंच गए हैं. इसको लेकर चीन में भी काम हो रहा है. वहीं जापान की एक दवा कंपनी Takeda भी इस पर काम कर रही है. कंपनी इम्यून सिस्टम थेरेपी नाम से इस दवा को डेवलप कर सकती है.

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मेडिकल साइंस की थ्योरी के मुताबिक, वायरस से रिकवर हो चुके व्यक्ति के शरीर में 'बीमारी से लड़ने वाले प्रोटीन' पैदा होते हैं. इसे अन्य बीमार व्यक्ति के शरीर में डाल दिया जाए तो उसे फायदा हो सकता है. ऐसे प्रोटीन को एंटीबॉडीज भी कहते हैं.

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आमतौर पर बीमार व्यक्ति का शरीर खुद से एंटीबॉडीज डेवलप करने की कोशिश करता है. लेकिन अगर दवा उपलब्ध हो जाए तो मरीजों को जल्दी ठीक किया जा सकता है और मृतकों की संख्या घटाई जा सकती है.

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खास बात ये है कि इबोला से लड़ने के लिए इसी थ्योरी का इस्तेमाल किया गया था. चीनी अधिकारियों का कहना है कि वे स्थानीय मरीजों के बीच इस थेरेपी का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन दवा तैयार करने में अब तक सफलता नहीं मिली है.

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