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देश का सबसे बड़ा मोटरेबल झूला पुल पब्‍ल‍िक के ल‍िए खुला, भारत की बड़ी कामयाबी

कृष्ण गोविंद कंसवाल
  • 08 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:13 PM IST
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उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध टिहरी झील पर देश का सबसे बड़ा डोबरा-चांठी मोटरेबल झूला पुल बनकर तैयार हो गया है और रविवार को उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका उद्घाटन किया. (ट‍िहरी गड़वाल से कृष्ण गोविंद कंसवाल की र‍ि‍पोर्ट)

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प्रतापनगर, लंबगांव और धौंतरी के लोगों की पीड़ा को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. उन लोगों को काफी तकलीफ उठानी पड़ी. लेकिन सरकार ने 440 मीटर लंबे इस पुल के निर्माण में आ रही धन की कमी को दूर करते हुए एक साथ 88 करोड़ रुपए स्वीकृत किए. इसके बाद पुल बनकर तैयार हुआ और रविवार को इसे त्रिवेंद्र सरकार ने जनता को समर्पित कर दिया. पुल का आकर्षण लाजवाब है.

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डोबरा-चांठी देश का सबसे बड़ा मोटरेबल झूला पुल है जो अपने आप में आकर्षण का एक बड़ा केंद्र है. इस पुल से टिहरी झील की मनोरम छटा देखते ही बनती है. प्रतापनगर, लंबगांव और धौंतरी में रहने वाली करीब 3 लाख से ज्यादा की आबादी को टिहरी जिला मुख्यालय तक आने के लिए पहले 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. इस पुल के शुरू होने के बाद अब यह दूरी घटकर आधी रह जाएगी.
 

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14 वर्षों का वनवास हुआ खत्म 

प्रतापनगर, लंबगांव और धौंतरी क्षेत्रवासियों के लिए इस पुल का निर्माण होना, वनवास खत्म होने जैसा है. क्योंकि उनके सपनों का पुल 14 साल के लंबे इंतजार
के बाद बनकर तैयार हो गया है. कई कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ खींच लिए थे. वर्ष 2016 में एक साउथ कोरियन कंपनी ने इसके निर्माण का जिम्मा
उठाया और 4 वर्षों के बाद डोबरा-चांठी ​सस्पेंशन ब्रिज बनकर तैयार है.
 
 

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पुल निर्माण में खर्च हुए 3 अरब रुपये 

डोबरा-चांठी वासियों की समस्याओं को देखते हुए त्रिवेंद्र सरकार ने इस पुल को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा. सालों से निर्माणाधीन इस पुल के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने एकमुश्त बजट जारी किया, जिसका परिणाम भी जनता के सामने है. इस पुल की क्षमता 16 टन भार सहन करने की है और उम्र 100 वर्षों तक. इस पुल की कुल चौड़ाई 7 मीटर है, जिसमें मोटर मार्ग की चौड़ाई 5.5 मीटर और फुटपाथ की चौड़ाई 0.75 मीटर है. इसके निर्माण में 3 अरब रुपए खर्च हुए हैं. 

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वर्ष 2006 में शुरू हुआ था काम

डोबरा-चांठी सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण साल 2006 में शुरु हुआ था, लेकिन काम के दौरान कई समस्याएं सामने आने लगीं. गलत डिजाइन, कमजोर प्लानिंग और विषम परिस्थितयों के चलते 2010 में इस पुल का काम बंद हो गया था. साल 2010 तक इस पुल के निर्माण पर लगभग 1.35 अरब खर्च हो चुके थे. दोबारा साल 2016 में लोक निर्माण विभाग ने 1.35 अरब की लागत से इस पुल का निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया. 


 

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2020 में बनकर तैयार हुआ

पुल के डिजाइन के लिए अंतराष्ट्रीय टेंडर निकाला गया. साउथ कोरिया की कंपनी योसीन को यह टेंडर मिला. कंपनी ने पुल का नया डिजाइन तैयार किया और तेजी से पुल का निर्माण शुरू किया. साल 2018 में एक बार फिर काम में व्यवधान पड़ा, जब निर्माणाधीन पुल के तीन सस्पेंडर अचानक टूट गए. तमाम मुश्किलों के बाद अब 2020 में यह पुल पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है.

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