नकली मोबाइल टावर से उड़ रहा है आपका पैसा! ये नया SMS Blast स्कैम बहुत खतरनाक है

आए दिन नए तरह का स्कैम देश में देखने को मिल रहा है. अब स्कैमर्स पोर्टेबल मोबाइल टावर लेकर घूम रहे हैं और आपके पास से मोबाइल हैक कर सकते हैं. ज्यादातर लोगों को इसका अंदाजा तक नहीं होता है.

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पोर्टेबल मोबाइल टावर से हो रहा स्कैम (Photo: ITG) पोर्टेबल मोबाइल टावर से हो रहा स्कैम (Photo: ITG)

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST

आज के डिजिटल ज़माने में फोन सिर्फ कॉल और मैसेज का साधन नहीं रहा. बैंकिंग, पेमेंट, OTP, हर छोटा-बड़ा काम मोबाइल पर ही होता है. लेकिन स्कैमर्स इसे यूज करके आपके है पैसे उड़ा रहे हैं. 

अभी जो मामला सामने आया है, वो देखने में साधारण SMS स्कैम जैसा लगता है, लेकिन है उससे कहीं ज़्यादा ख़तरनाक और घातक.

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि फ्रॉडस्टर्स अब फर्जी मोबाइल टावर और SMS ब्लास्ट टेक्निक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आपके फोन का नेटवर्क रूट बदलकर सीधे खतरे के चैनल पर भेज दिया जाता है.

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फोन सिग्नल से खेल: नकली टावर कैसे आपका फोन चुरा लेते हैं

हम में से ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि हमारा फोन हमेशा टावर से ही जुड़ता है और वही सही नेटवर्क देता है. लेकिन अब स्कैम वाले छोटे-छोटे पोर्टेबल डिवाइसेज़ का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो असली टावर की नकल करते हैं. इसे साइबर एक्सपर्ट्स Fake BTS कहते हैं..  मतलब नकली बेस स्टेशन.

ये डिवाइस किसी कार के ट्रंक में, बैकपैक में या सड़क किनारे आसानी से छिप सकते हैं. जब फोन अपना सिग्नल खोजता है, तो वह सबसे मजबूत सिग्नल वाला नेटवर्क चुनता है और कई बार वह फर्जी टॉवर बन जाता है. इससे फोन असल नेटवर्क बॉन्ड नहीं होता, बल्कि कम सिक्योर नेटवर्क पर चला जाता है जहां सिक्योरिटी का लेवल बहुत नीचे होता है.

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसे फर्जी टावर फोन को 5G या 4G से हटाकर 2G या अन्य कमजोर सिग्नल पर पुश करते हैं,  और इसी स्थिति का इस्तेमाल करके यह स्कैम शुरु होता है.

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SMS Blaster: फ़ोन से फिशिंग और फ्रॉड मैसेज

फर्जी टावर पर फंसने के बाद जो असली खतरा सामने आता है, वह है SMS Blaster Scam.
यह सिर्फ फ़िरौती जैसा टेक्स्ट नहीं भेजता, बल्कि यह SMS को बड़े पैमाने पर फैलाने की तकनीक है, जिसमें आपके नंबर से कई लोगों को फेक लिंक भेजा जाता है.

यह SMS दिखने में कुछ इस तरह का होता है कि आपका बैंक खाता लॉक होने वाला है, इस लिंक पर तुरंत क्लिक करें या OTP अपडेट करें वरना सेवाएं बंद हो जाएंगे. 

बहुत से यूज़र्स में डर और जल्दी का अहसास होता है, और वही स्कैमर्स का मकसद होता है. इसीलिए यह साधारण SMS स्कैम नहीं रहा, इसके पीछे नेटवर्क-हाइजैकिंग और टेक्निकल स्कीम छिपी है.

सिर्फ इंडिया ही नहीं, ग्लोबल लेवल पर पकड़े जा रहे हैं स्कैमर्स

यह घटना भारत तक सीमित नहीं है. यूरोप में, ग्रीस की पुलिस ने ऐसे फर्जी सेल टावर के साथ अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिसने कार के ट्रंक में मोबाइल कम्प्यूटिंग सिस्टम छुपाकर लोगों के फोन को नकली नेटवर्क से जोड़ा था.

यानी यह सिर्फ थ्योरी नहीं है, असल मामले सामने आ रहे हैं जहां यह प्रोसेस लोगों के फोन को रीकनेक्ट कर फ्रॉड SMS भेज रही है.

यह पूरी समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स देश-दुनिया में धड़ाधड़ चेतावनी दे रहे हैं कि यह एक नई तरह की साइबर आपराधिक तकनीक है, जो नेटवर्क पर कब्ज़ा करके फ्रॉड फैलाती है.

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आम यूज़र को क्यों खतरा है?

आपके फोन का नेटवर्क असली टॉवर से नहीं, नकली नेटवर्क से जुड़ना. ये हैं नुकसान. 

  • SMS और नोटिफिकेशन आपके कंट्रोल के बाहर भेजे जा सकते हैं.

  • आपके नंबर से बिना इजाजत के ट्रांजैक्शन फ्रॉड शुरू हो सकते हैं.

  • बैंकिंग OTP और पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है.

  • आसानी से हैकर्स तक जा सकता है.

  • और सबसे खतरनाक ये है कि यूज़र को पता भी नहीं चलेगा कि यह सब नेटवर्क लेवल पर हो रहा है.

यानी यह सिर्फ स्कैम लिंक वाला मामला नहीं रहा. यह एक ऐसी स्ट्रैटिजी है जिससे आपका फोन का बेसिक नेटवर्क सेफ से अनसेफ में बदल दिया जाता है.

नेटवर्क कंपनियों की मजबूरी

टेलीकॉम कंपनियां लगातार अपने नेटवर्क को सुरक्षित बनाने का दावा करती हैं, लेकिन यह स्कैम ऐसे सिस्टम का यूज करता है जिसे नेटवर्क सेक्टर्स अभी तक पूरी तरह रोख नहीं पाए हैं.

फर्जी टावरों को रोक पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि मोबाइल फोन का प्राइमरी काम सबसे स्ट्रॉन्ग सिग्नल से जुड़ना है, चाहे वह असली हो या नकली. और स्कैमर्स इसी नियम का फायदा उठा रहे हैं.

क्या हो सकता है अगला कदम?

एक तरफ़ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और सरकारें लगातार इस तकनीक को समझने की कोशिश कर रही हैं, दूसरी तरफ़ यह साफ़ भी है कि नेटवर्क लेवल के हथियार को रोकना आसान नहीं. यह समस्या सिर्फ इंडिया की ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर फैली हुई है.

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कुछ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि नेटवर्क कंपनियों को नए सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाना होंगे, जिससे फोन सिर्फ असली टावरों को ही पहचान सके. लेकिन दूसरी तरफ़ यह सवाल भी है कि आम यूज़र को इतनी तकनीक कैसे समझाई जाए, ताकि वो खुद इससे सतर्क रहें. 

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