ऑनलाइन गेमिंग को लेकर बड़ा खुलासा, बच्चे कब करते हैं आत्महत्या? रिसर्च से हुआ बड़ा खुलासा

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट में बताया है कि ऑनलाइन गेम्स से दिमाग पर क्या असर पड़ता है. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गेमिंग रिवॉर्ड असल में ब्रेन के सिस्टम को प्रभावित करते हैं. कई केस में गेम में हारने पर या फिर पेरेंट्स के द्वारा स्मार्टफोन छीनने की वजह से युवा खुद को चोट पहुंचा लेते हैं.

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ऑनलाइन गेमिंग दिमाग को ऐसे करता है कंट्रोल. (Photo: ITG Design) ऑनलाइन गेमिंग दिमाग को ऐसे करता है कंट्रोल. (Photo: ITG Design)

रोहित कुमार

  • नई दिल्ली ,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

स्मार्टफोन के लिए ढेरों गेमिंग ऐप है, जिनमें से कुछ तो पॉपुलैरिटी के शिखर पर है. स्मार्टफोन गेमिंग से मेंटल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है, उसके बारे में जानते हैं. दरअसल, गृह मंत्रालय की नोडल एजेसी I4C के तहत काम करने वाले साइबर दोस्त I4C ने पोस्ट करके बताया है कि ऑनलाइन गेमिंग सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं है बल्कि यह कई केस में मेंटल हेल्थ रिस्क भी बन चुकी है. 

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साइबर दोस्त I4C ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट में बताया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट में कहा है कि ऑनलाइन गेम्स से दिमाग पर क्या असर पड़ता है. 

 रिवॉर्ड ब्रेन के सिस्टम को प्रभावित करता है

रिपोर्ट में बताया है कि गेमिंग रिवॉर्ड ब्रेन के सिस्टम को प्रभावित करता है. कई केस में गेम में हारने पर या फिर पेरेंट्स के द्वारा स्मार्टफोन छीनने की वजह से युवाओं ने खुद को चोट पहुंचाई. यहां तक कई युवाओं ने अपनी जान तक दे डाली. 

ऑनलाइन गेमिंग का डिजाइन 

रिपोर्ट में बताया है कि ऑनलाइन गेमिंग को ऐसे डिजाइन किया जाता है कि युवाओं में उसको बार-बार खेलने की आदत हो जाती है. यही आदत आगे चलकर लत में बदल जाती है. 

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साइबर दोस्त I4C ने किया है पोस्ट 

रिवॉर्ड सिस्टम डोपामिन केमिकल रिलीज करता है 

ऑनलाइन गेमिंग का रिवॉर्ड सिस्टम और सोशल कनेक्शन दिमाग में डोपामिन केमिकल रिलीज करता है, जिससे ऑनलाइन गेमिंग खेलने की और इच्छा बढ़ जाती है. अगर कोई गेम खेलने से मना करता है या फिर वह खुद काफी देर तक गेम नहीं खेलते हैं, तो उससे वे चिड़चिड़े और गुस्सैल हो जाते हैं. 

ऑनलाइन गेमिंग लत के नुकसान 

ऑनलाइन गेमिंग एडिक्शन की वजह से युवाओं में तनाव और काम के प्रति लगाव कम हो जाता है. इससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है और एकेडमिक में उनकी परफॉर्मेंस डाउन होती है. 

ऑनलाइन गेमिंग की लत को ऐसे पहचानें 

ऑनलाइन गेमिंग को लत को पहचानना आसान है, जिसके लिए कुछ साइन को पहचानना होगा.

  • अगर रोज कई घंटो तक गेम खेलते हैं. 
  • हारने या ना खेलने पर चिड़चिड़ाते हैं. 
  • पढ़ाई में परफॉर्मेंस डाउन होने लगे तो. 
  • नींद कम आना या झूठ बोलकर गेम खेलना. 

ऑनलाइन गेमिंग की लत ऐसे छुड़ाएं 

ऑनलाइन गेमिंग की लत को छुड़ाना चाहते हैं तो उसे धीरे-धीरे कम करना होगा. उदाहरण के तौर पर अगर आप लगातार 4 घंटे तक गेमिंग खेलते हैं तो उसे 3 घंटे तक कर दें. इसके बाद धीरे-धीरे आधा-आधा घंटा कम करें. 

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खाली समय में कुछ और काम करें 

ऑनलाइन गेमिंग की लत छोड़ने के लिए जरूरी है कि अपने खाली समय को किसी दूसरे काम में यूज करें. इसके लिए आप स्पोर्ट्स, साइकलिंग, वॉकि या फिर जिम आदि को जॉइन कर सकते हैं. 

खुद से सवाल करें 

ऑनलाइन गेमिंग की लत को छुड़ाने के लिए जरूरी है कि आप खुद से सवाल करें. खुद से पूछें कि क्या गेम खेलना सही है और क्या इससे मुझे फायदा हो रहा है. ऑनलाइन गेमिंग से असली जिंदगी में मुझे क्या हासिल हो रहा है. 

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