साइबर ठगी का एक नया केस सामने आया है, जहां विक्टिम को बड़ी ही अजीब तरीके से डिजिटल अरेस्ट किया गया. गुजरात के गांधीनगर में 73 साल के बुजुर्ग से साइबर ठगों ने 49 लाख रुपये ठग लिए. विक्टिम से कहा गया कि हर घंटे पर एक मैसेज करना होगा कि मैं सेफ हूं और बिना परमिशन सोना मना है. ये जानकारी मीडिया रिपोर्टस से मिली है.
साइबर ठगी केस की शुरुआत 10 अक्तूबर 2025 से हुई है. जब बुजुर्ग शख्स को एक मैसेज आया और उसने खुद को टेलीकॉम कंरनी का कर्मचारी बताया और अपना नाम अभिमन्यु बताया.
बुजुर्ग को फर्जी केस के नाम पर डराया
आरोपी ने बुजुर्ग शख्स को बताया कि आपके नाम पर पुलिस दर्ज है. विक्टिम को बताया गया है कि उनकी सिम और बैंक अकाउंट को ब्लॉक कर दिया जाएगा, अगर वह जांच में सहयोग नहीं करते हैं.
WhatsApp पर दिल्ली पुलिस बनकर किया कॉल
कुछ मिनट्स के अंदर एक दूसरे शख्स का WhatsApp के जरिए कॉल आया. कॉलर ने बताया कि वह दिल्ली पुलिस से हैं और नाम नीरज ठाकुर बताया है.
बुजुर्ग पर लगाए फर्जी आरोप
साइबर ठग नीरज ठाकुर ने बुजुर्ग को डराना के लिए अलग-अलग फर्जी आरोप लगाए. विक्टिम को बताया है कि उनके बैंक अकाउंट और आधार कार्ड का मिसयूज किया गया है.
करोड़ों की लेने देन के फर्जी आरोप
आपके नाम पर खोला गया बैंक अकाउंट एक 66 करोड़ रुपये के स्कैम में शामिल है और 6 करोड़ रुपये की रकम तो आपके ही बैंक अकाउंट में जमा की गई है.
हर घंटे मैसेज करने को कहा
इसके बाद विक्टिम बुजर्ग को डिजिटल अरेस्ट रखा और जांच में सहयोग करने को कहा. इसके बाद विक्टिम से कहा गया कि उनको हर एक घंटे में एक मैसेज करना होगा. मैसेज में लिखकर भेजना होगा कि मैं सेफ हूं. साथ ही विक्टिम को बिना परमिशन के नींद लेने के लिए मना किया गया.
एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा
विक्टिम को एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा. इस दौरान जांच के नाम पर विक्टिम से उनके परिवार और बैंक डिटेल्स मांगी गई. इसके साथ ही विक्टिम को बताया गया है कि जांच के लिए कुछ रकम एक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा.
अलग-अलग बैंक अकाउंट में भेजे रुपये
आरोपियों ने विक्टिम से वादा किया कि अगर वह निर्दोष हैं तो उनकी रकम वापस मिल जाएगी. इसके बाद उन्होंने करीब 49 लाख रुपये दो बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी.
7 दिनों में रुपये वापस करने का वादा
फिर विक्टिम को नवंबर में बताया गया है कि वह केस बंद हो चुका है और सभी रकम 7 दिनों के अंदर बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी. इसके बाद विक्टिम को जब रुपये नहीं मिले, तब उन्होंने पड़ताल की तो उनको पता चला कि वह साइबर ठगी के शिकार हो चुका है.
विक्टिम ने 31 जनवरी को गांधीनगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में जाकर कंप्लेंट दर्ज कराई. अब पुलिस ने इस मामले को लेकर जांच कर रही है.
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