पिछले कई सालों से टेक इंडस्ट्री में एक सवाल लगातार घूम रहा है. क्या Apple कभी फोल्डेबल आईफोन बनाएगा. सैमसंग, मोटोरोला और ओप्पो जैसे ब्रांड्स इस फॉर्म फैक्टर में काफी आगे निकल चुके हैं. लेकिन ऐपल हमेशा की तरह इस पूरे मामले पर चुप रहा.
अब जो नई रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, उनसे साफ संकेत मिल रहा है कि ऐपल भी आखिरकार क्लैमशेल स्टाइल फोल्डेबल आईफोन, यानी फ्लिप फोन जैसे डिजाइन पर काम कर रहा है.
ऐपल अब फोल्डेबल गेम में क्यों उतर रहा है?
असल बात ये है कि स्मार्टफोन मार्केट अब एक तरह से रुक सा गया है. हर साल नया आईफोन आता है, लेकिन डिजाइन में बड़ा बदलाव कम दिखता है. ऐपल ये अच्छी तरह जानता है कि प्रीमियम ग्राहकों को एक्साइटेड रखने के लिए कुछ नया दिखाना जरूरी है.
फ्लिप स्टाइल फोल्डेबल फोन यहां ऐपल के लिए सही बैठता है. क्योंकि ये टैबलेट नहीं बनता, बल्कि जेब में रखने लायक ही रहता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐपल बुक स्टाइल फोल्डेबल से ज्यादा क्लैमशेल डिजाइन पर फोकस कर रहा है. यानी गैलेक्सी जेड फ्लिप जैसा फोन, जो बंद होने पर छोटा और खोलने पर नॉर्मल आईफोन जैसा दिखे.
ऐपल की सोच यहां साफ है. फोल्डेबल टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक लाने के लिए फोन को जरूरत से ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड नहीं बनाना.
डिजाइन में क्या बदल सकता है?
जो लीक्स और सप्लाई चेन से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं, उनसे ये साफ है कि ऐपल डिजाइन को लेकर बहुत केयरफुल रहेगा.
ऐपल का पहला फोल्डेबल फोन शायद देखने में बहुत फ्यूचरिस्टिक न लगे, लेकिन अंदर से काफी पॉलिश्ड होगा.
सबसे बड़ा फोकस होगा हिंज मैकेनिज्म पर. क्योंकि ऐपल को स्क्रीन की क्रीज़ से डर लगता है. सैमसंग ने सालों में इस क्रीज़ को काफी बेहतर किया है, लेकिन ऐपल तब तक एंट्री नहीं करता जब तक समस्या लगभग खत्म न हो जाए. यही वजह है कि एप्पल का फोल्डेबल थोड़ा देर से आ रहा है.
स्क्रीन के मामले में भी ऐपल अलग रास्ता अपना सकता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि कंपनी कस्टम ओएलईडी पैनल पर काम कर रही है, जिसमें मजबूती और कलर क्वालिटी बेहतर होगी.
बाहर की स्क्रीन छोटी हो सकती है. नोटिफिकेशन, कॉल और जरूरी जानकारी देखने के लिए. पूरा इस्तेमाल करने के लिए फोन खोलना पड़ेगा.
ऐपल की सोच हमेशा यही रही है. कम चीजें, लेकिन पूरी तरह कंट्रोल में.
बैटरी और परफॉर्मेंस का असली खेल
फोल्डेबल फोन की सबसे बड़ी दिक्कत बैटरी होती है. दो स्क्रीन, मूविंग पार्ट्स और पतला डिजाइन बैटरी पर सीधा असर डालते हैं.
ऐपल यहां चिप लेवल ऑप्टिमाइजेशन पर भरोसा कर सकता है. नई जनरेशन की ए-सीरीज़ चिप के साथ पावर एफिशिएंसी को सबसे ऊपर रखा जाएगा.
कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि एप्पल बैटरी को फोन के दोनों हिस्सों में बांट सकता है, ताकि वजन बैलेंस्ड बना रहे और फोन फोल्ड होने पर किसी एक जगह ज्यादा दबाव न पड़े.
यहां ऐपल को साफ फायदा मिलता है. हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों उसी के कंट्रोल में होते हैं. आईओएस को फोल्डेबल फोन के हिसाब से ढालना ऐपल के लिए आसान होगा, क्योंकि उसका इकोसिस्टम पहले से बहुत टाइट है.
सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस कैसा होगा
यहीं ऐपल अपना असली खेल दिखा सकता है. आईओएस अभी फोल्डेबल फोन के लिए नहीं बना है, लेकिन माना जा रहा है कि एप्पल धीरे-धीरे अडैप्टिव इंटरफेस पर काम कर रहा है.
फोन फोल्ड हो तो ऐप का बिहेवियर बदले. कैमरा इस्तेमाल करने का तरीका अलग हो. आधा फोल्ड फोन डेस्क पर रखकर मिनी डिस्प्ले की तरह काम करे.
कुछ लीक्स में ये भी इशारा मिला है कि ऐपल फोल्डेबल आईफोन को वीडियो कॉलिंग और कंटेंट क्रिएशन के लिए प्रमोट कर सकता है. मतलब फोन आधा फोल्ड करके टेबल या डेस्क पर रखा जा सकेगा. स्टैंड या ट्राईपॉड की जरूरत नहीं होगी.
लॉन्च टाइमलाइन और कीमत की सच्चाई
यहां एक जरूरी बात समझनी होगी. ये सब अभी कन्फर्म प्रोडक्ट नहीं है. ये सप्लाई चेन से जुड़ी बातचीत, एनालिस्ट रिपोर्ट्स और कई टेक वेबसाइट्स की जानकारियों पर आधारित है. ऐपल ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है. ऐसे भी लॉन्च से पहले ऐपल कभी अपने प्रोडक्ट को ऑफिशियली डिस्क्लोज नहीं करता है.
अगर टाइमलाइन की बात करें, तो ऐपल का पहला Foldable iPhone इसी साल आ सकता है. या अगले साल के भी टाला जा सकता है. कीमत बिल्कुल सस्ती नहीं होगी.
अगर ऐपल फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करता है, तो वो पूरी तरह प्रीमियम कैटेगरी में होगा. भारत में इसकी कीमत आईफोन प्रो मैक्स से भी ऊपर जा सकती है.
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