अमेरिकी टेक दिग्गज Apple और भारत की भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग Competition Commission of India (CCI) आमने सामने हैं. CCI ने Apple को आख़िरी चेतावनी दी है कि अगर कंपनी जल्द जवाब नहीं देती तो वह एंटीट्रस्ट मामले को उसके बिना ही आगे बढ़ा देगी.
यह मामला iOS App Store के बिजनेस प्रैक्टिस से जुड़ा है, जिसमें Apple पर बाजार में अपने दबदबे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है. मामला 2022 से चल रहा है जब कुछ कंपनियों और इंडियन स्टार्टअप्स ने Apple के खिलाफ CCI में शिकायत दर्ज कराई थी.
आरोप था कि ऐपल ने अपने App Store में ऐसे नियम लगाए हैं जो डेवेलपर्स को नुकसान पहुंचाते हैं और अपनी ताकत का मिसयूज करते हैं. जांच के बाद 2024 में CCI की रिपोर्ट में कहा गया कि Apple ने अपने डोमिनेंट पोज़ीशन का गलत इस्तेमाल किया है.
लेकिन केस अब सिर्फ़ आरोपों तक सीमित नहीं रहा. CCI को Apple की तरफ से जवाब देने में साल भर से ज्यादा की देरी मिली है. अक्टूबर 2024 में Apple से कहा गया था कि वह जांच रिपोर्ट पर आपत्तियां और जुर्माने का हिसाब देता दे, लेकिन तब से लगातार Apple ने समय बढ़ाने के लिए अनुरोध दिया.
अब CCI ने Apple को साफ कह दिया है कि अब और समय नहीं मिलगा. अगर Apple ने अगले हफ्ते तक जवाब नहीं दिया तो वह केस को अकेले आगे बढ़ाएगी यानी यूनिलैटरल ऐक्शन लेगी. इस चेतावनी के बाद Apple की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
Apple की चिंता इसके संभावित बड़े जुर्माने को लेकर है. CCI अगर जुर्माना लगाने का फैसला करता है और जुर्माने के लिए ग्लोबल टर्नओवर का आधार लेता है, तो Apple पर $38 बिलियन (लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा) तक का जुर्माना लग सकता है. यह संख्या Apple जैसे कंपनी के लिए बहुत बड़ी है.
ऐपल अदालत में दे रहा चुनौती
Apple ने इस नियम को अदालत में चुनौती दी है. कंपनी का कहना है कि अगर जुर्माना उसी बिजनेस के आधार पर लगाया जाता है जो भारत में हुआ है, तो यह ज्यादा सही है. लेकिन CCI का कहना है कि बड़े ग्लोबल खिलाड़ियों पर स्थानीय नियम लागू करने के लिए ग्लोबल टर्नओवर विचार में लेना ज़रूरी है.
Apple ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस पूरे मामले को रोकने की कोशिश भी की थी, जब तक अदालत नए जुर्माने का फ़ैसला नहीं कर देती. लेकिन CCI ने इस मांग को खारिज कर दिया. अब Apple का अगली कोर्ट सुनवाई 27 जनवरी 2026 को है, जिसमें उसकी चुनौती पर अदालत अपना फ़ैसला सुनाएगी.
इस पूरे विवाद में यह साफ हुआ है कि भारत बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ अपने नियमों को सख्ती से लागू करने को तैयार है. Apple जैसी कंपनी जो दुनिया भर में काम करती है, अगर भारतीय नियमों को लेकर समझौता नहीं करती, तो CCI बिना किसी विलंब के अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है.
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि यह बड़े इंटरनेट प्लेटफॉर्म और भारतीय बाजार के नियमों में बैलेंस का सवाल है. अगर Apple को फ़ाइनल चेतावनी के बाद जवाब देना पड़ता है और बाद में जुर्माना लगता है, तो यह टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत होगा कि भारत के नियम सिर्फ बड़े नामों तक सीमित नहीं हैं.
वैसे तो Apple ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसने अपनी बिजनेस पॉलिसी में कोई गलत काम नहीं किया है. लेकिन अब CCI की चेतावनी के बाद मामला कोर्ट के फैसले और CCI की प्रक्रिया दोनों पर निर्भर हो गया है, और अगले कुछ हफ्तों में इसका फ़ैसला निकल सकता है.
क्यों जुर्माना लगाना चाहती है CCI?
यह समझना आसान है कि CCI Apple पर जुर्माना क्यों लगाना चाहती है. CCI का काम है यह देखना कि कोई बड़ी कंपनी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करके बाजार में दूसरों के लिए रास्ता बंद न कर दे. उदाहरण के लिए, Apple iPhone में सिर्फ अपना ही App Store इस्तेमाल करने देता है, थर्ड पार्टी ऐप स्टोर की इजाजत नहीं है.
साथ ही, App Store पर ऐप बेचने वाले डेवलपर्स से 15 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है और कई बार उन्हें अपने ऐप में बाहरी पेमेंट लिंक डालने की भी छूट नहीं मिलती. CCI का मानना है कि इससे छोटे डेवलपर्स और स्टार्टअप्स को नुकसान होता है, क्योंकि उनके पास iPhone यूज़र्स तक पहुंचने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता. ठीक वैसे ही जैसे अगर किसी मॉल का मालिक कहे कि उसकी बिल्डिंग में सिर्फ उसकी दुकान चलेगी, बाकी कोई दुकान नहीं खोल सकता,तो यह बाजार के नियमों के खिलाफ माना जाएगा.
इसी लॉजिक पर CCI Apple से कह रही है कि अगर उसने अपने प्लेटफॉर्म पर गलत तरीके से दबदबा बनाया है, तो उस पर जुर्माना लगना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी बड़ी टेक कंपनी भारत में ऐसी पॉलिसी न चला सके जो बाकी बिजनेस को कुचल दे.
मुन्ज़िर अहमद