AI से बना वीडियो डाला तो फंस सकते हैं आप, सरकार ने कसा शिकंजा, पांच प्वाइंट्स में समझें

सरकार ने AI वीडियोज पर शिकंजा कसने का ऐलान कर दिया है. सोशल मीडिया कंपनियों को अब AI वीडियोज पर लेबल लगाना होगा. इन दिनों AI वीडियोज की वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है. आइए जानते हैं इस नियम के बाद क्या बदलने वाला है.

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मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

सोशल मीडिया पर आजकल जो वीडियो और फोटो दिखते हैं, उन पर आंख बंद करके भरोसा करना अब मुश्किल हो गया है.

कभी किसी नेता का नकली बयान वायरल हो जाता है, कभी किसी आम इंसान का डीपफेक वीडियो फैल जाता है.

AI टूल्स ने कंटेंट बनाना आसान कर दिया है, लेकिन साथ ही झूठ और धोखे का रास्ता भी खोल दिया है. कई बार यूजर को पता भी नहीं चलता कि जो दिख रहा है, वह असली है या मशीन से बना हुआ.

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इसी गड़बड़ी को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने AI से बने कंटेंट पर नए नियम लागू किए हैं. अब सोशल मीडिया कंपनियों और यूजर्स दोनों पर जिम्मेदारी डाली गई है.

कौन सा कंटेंट AI से बना है, यह बताना जरूरी होगा. फर्जी और भ्रामक कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी. आसान शब्दों में कहें तो इंटरनेट पर फैल रहे नकली वीडियो और फोटो पर अब सरकार ने ब्रेक लगाने की कोशिश की है.

आइए पांच प्वाइंट्स में जानते हैं AI जेनेरेटेड कंटेंट के लिए अब भारत में क्या प्रावधान है. 

किसी भी AI विजुअल के 10% हिस्सों में लेबलिंग जरूरी

नियम के अनुसार कोई भी AI जेनेरेटेड विजुअल का 10% हिस्सों में लेबल होना मैंडेटरी है. ऑडियो और वीडियो क्लिप में भी 10% हिस्सा लेबलिंग के लिए होगा, ताकि लोगों को पता चल सके की विजुअल AI जेनेरेटेड है.

प्लेटफॉर्म्स को हर यूजर्स से ये पूछना होगा किजो वीडियो अपलोड किया जा रहा है वो सिंथेटिक है या नहीं. इसके लिए इन प्लेटफॉर्म्स को वेरिफिकेशन टूल्स यूज करने होंगे. हर तीन महीने में यूजर्स को पेनाल्टी के लिए रिमाइंडर दिया जाएगा अगर वो नियम तोड़ते हैं.

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1. अब AI कंटेंट पर टैग लगाना जरूरी होगा
अगर कोई वीडियो, फोटो या ऑडियो AI से बना है, तो उसे बिना पहचान के पोस्ट नहीं किया जा सकेगा. सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे कंटेंट पर साफ लेबल दिखाना होगा ताकि यूजर समझ सके कि यह असली नहीं है.

2. फर्जी और गलत AI कंटेंट 3 घंटे में हटेगा
अगर किसी प्लेटफॉर्म को पता चलता है कि कोई डीपफेक या भ्रामक AI कंटेंट फैल रहा है, तो उसे तीन घंटे के अंदर हटाना होगा. पहले यह समय 36 घंटे था. अब देरी पर सीधी जिम्मेदारी कंपनी की होगी.

3. यूजर को बताना होगा कंटेंट AI से बना है या नहीं
अब पोस्ट करते समय यूजर को यह बताना होगा कि कंटेंट AI से बना है या नहीं. प्लेटफॉर्म सिर्फ भरोसा नहीं करेगा. कंपनियों को टेक्नोलॉजी से यह भी जांचना होगा कि यूजर सच बोल रहा है या नहीं.

4. बच्चों और निजी तस्वीरों से जुड़े AI कंटेंट पर सख्ती
बच्चों से जुड़ा गलत कंटेंट, बिना सहमति के बनाई गई फोटो या वीडियो, फर्जी डॉक्यूमेंट और हिंसा दिखाने वाला AI कंटेंट अब सीधे नियमों के तहत हटाया जाएगा. ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म को इंतजार नहीं करना होगा.

5. नियम तोड़े तो प्लेटफॉर्म पर भी कार्रवाई होगी
अगर सोशल मीडिया कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है. मतलब अब सिर्फ यूजर नहीं, प्लेटफॉर्म भी जिम्मेदार होगा.

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