2032 में खत्म हो जाएगी दुनिया?

क्या प्रलय या कयामत के दिन आ गए हैं? यह सवाल एक बार फिर जोर-शोर से पूछा जा रहा है. खगोलशास्त्रियों का कहना है कि कुछ छोटे और बड़े पुच्छल तारे धरती की ओर बेरोक-टोक बढ़े आ रहे हैं. संभावना है कि इनमें से कुछ हमारी पृथ्वी से टकरा सकते हैं.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2014,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

क्या प्रलय या कयामत के दिन आ गए हैं? यह सवाल एक बार फिर जोर-शोर से पूछा जा रहा है. खगोलशास्त्रियों का कहना है कि कुछ छोटे और बड़े पुच्छल तारे (धूमकेतु) धरती की ओर बेरोक-टोक बढ़े आ रहे हैं. संभावना है कि इनमें से कुछ हमारी पृथ्वी से टकरा सकते हैं.

पिछले साल टाइम पत्रिका ने यह खबर दी थी कि एक पुच्छल तारा या छुद्र ग्रह तेजी से पृथ्वी की दिशा में आ रहा है. यह बहुत ही शक्तिशाली है और यह 50 परमाणु बमों से भी ज्यादा विनाशकारी है. यह पृथ्वी से आगामी 18 वर्षों में टकरा सकता है. इससे होने वाले विनाश की कल्पना भी नहीं की जा सकती है.

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टाइम ने बताया था कि यूक्रेन के खगोलविदों ने एक विशाल छुद्र ग्रह को पृथ्वी की ओर आते देखा है. इसे टीवी 135 का नाम दिया गया है और बताया गया कि यह 26 अगस्त, 2032 को पृथ्वी से टकराएगा. इस अनुमान की कई देशों के खगोलशात्रियों ने पुष्टि की.

वैज्ञानिक इस बात को लेकर एकमत नहीं हैं कि 1,350 फुट लंबी चट्टान वाकई उस दिन धरती से टकराएगी. लेकिन उनका अंदाजा है कि इसमें 2,500 मेगाटन टीएनटी की शक्ति होगी.

फरवरी 2013 में रूस के चेलीबिन्स्क में एक पुच्छल तारा गिरा था. वह 19 किलोमीटर की रफ्तार से वहां गिरा जिससे बहुत क्षति पहुंची. उसने हजारों घरों की खिड़कियां हिला दीं और कई मकानों को नुकसान पहुंचाया. उस विस्फोट की ताकत हिरोशिमा में गिरे परमाणु बम से 30 गुना ज्यादा थी. सैकड़ों लोग उसमें जख्मी हुए जबकि वह एक बहुत ही छोटा सा टुकड़ा था और उसकी लंबाई मात्र 1,000 मीटर थी. उस घटना के बाद से वैज्ञानिक चौकन्ने हो गए हैं और उन्होंने इसकी खोज तेज कर दी है.

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2080 में भी ऐसा हो सकता है
वैज्ञानिकों का कहना है कि एक और पुच्छल तारा जिसे 1950डीए का नाम दिया गया है, तेजी से पृथ्वी की ओर आ रहा है. यह इस गति से धरती पर 16 मार्च, 2080 में गिरेगा. इसका व्यास 1,000 मीटर का है और इस बात की संभावना है कि यह पृथ्वी से 38,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराएगा. यह इतनी तेजी से घूम रहा है कि गुरुत्वाकर्षण के नियम भी धरे रह गए हैं. यह भी कहा जा रहा है कि शायद यह हमारे अंतरिक्ष में आने से पहले ही टुकड़े-टुकड़े हो जाए.

हालांकि कुछ वैज्ञानिक मान रहे हैं कि ये घटनाएं संभव नहीं हैं और ये पुच्छल तारे धरती से टकराने के पहले खुद ही चूर-चूर हो जाएंगे. उनका मानना है कि सूर्य की किरणों के प्रभाव से ये तारें नष्ट हो जाएंगे. लेकिन कई यह मान रहे हैं कि इस तरह की घटना हो सकती है.

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