भारतीय महिलाओं की प्रशंसा करते हुए हिलेरी ने कहा, ‘महिलाएं बढ़ेंगी, तो सभी बढ़ेंगे’

अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए डेमोक्रैटिक उम्मीदवारी की होड़ में उतरीं हिलेरी क्लिंटन ने छोटे ऋण के लिए संगठित प्रयास करने वाली भारतीय महिला उद्यमियों का उदाहरण देते हुए दुनियाभर में महिलाओं के लिए समान वेतनमान, यौन हिंसा के खात्मे और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराए जाने का आह्वान किया.

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हिलेरी क्लिंटन हिलेरी क्लिंटन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अप्रैल 2015,
  • अपडेटेड 8:03 PM IST

ने छोटे ऋण के लिए संगठित प्रयास करने वाली भारतीय महिला उद्यमियों का उदाहरण देते हुए दुनियाभर में महिलाओं के लिए समान वेतनमान, यौन हिंसा के खात्मे और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराए जाने का आह्वान किया. इस दौरान हिलेरी ने कहा कि महिलाएं आगे बढ़ेंगी, तो सभी आगे बढ़ेंगे.

उन्होंने कहा, ‘जब महिलाओं को रोका जाता है तो हमारा देश रुक जाता है. जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो सबकुछ आगे बढ़ता है.’ हिलरी क्लिंटन ने इसे चौंका देने वाली बात बताई कि विकसित देशों में अमेरिका एक ऐसा देश है जो महिलाओं को मां बनने पर सवैतनिक अवकाश (पेड लीव्स) की गारंटी नहीं देता.

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उन्होंने कहा की महिलाओं को रोजगार में पुरुषों के बराबर अवसर मिला तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 2030 तक 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. उन्होंने इस बात का उदाहरण दिया कि कैसे भारत, बांग्लादेश और लाइबेरिया में महिलाएं अपनी जीविका सुधारने और अपने अधिकार हासिल करने के लिए संगठित प्रयास कर रही हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमने देखा कि पूरी दुनिया में महिलाएं बदलाव की एजेंट, तरक्की की वाहक और शांति कायम करने वाली बनी हैं. मैंने देखा है कि भारत और बांग्लादेश में जिन महिलाओं के पास फूटी कौड़ी नहीं थी, उन्होंने छोटे ऋण लेने और अपना छोटा कारोबार शुरू करने के लिए संगठित प्रयास किया.’

हिलेरी क्लिंटन ने कहा, ‘कई महिलाओं को एक ही काम के लिए पुरुषों की तुलना में अब भी कम भुगतान किया जाता है और यह अंतर अश्वेत महिलाओं के लिए और भी अधिक है.’ समान वेतनमान के मापदंड पर 142 देशों के समूह में अमेरिका को 65 वें स्थान पर रखने के विश्व आर्थिक मंच की रैकिंग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘इसकी कल्पना कीजिए, हमें पहले नंबर पर होना चाहिए था.’

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इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति पद के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत करने वाली हिलेरी ने ‘विश्व में महिलाएं’ नामक छठे वार्षिक सम्मेलन में कहा कि पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से बदलाव का वाहक बनना है और सभी के लिए बराबरी वाले विश्व सुनिश्चित करने के लिए जरूरी तरक्की में योगदान करना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया ऐसे बदलाव को हासिल करने के पहले से कहीं ज्यादा करीब है.

उन्होंने कहा, ‘यह विश्वास करना मुश्किल है कि 2015 में भी महिलाएं मां बनने की कीमत चुकाती हैं.’ उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए समान अधिकार का संघर्ष बस महिलाओं का संघर्ष नहीं है बल्कि पूरी दुनिया का संघर्ष है और हमें मिलकर उसे जीतना है.

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