UP में आर्थिक आधार पर आरक्षण का रास्ता साफ, पारित हुए तीन विधेयक

विधानसभा से दो और प्रस्ताव पारित किए गए. इनमें सूबे के संपत्ति विभाग के नियंत्रण में आने वाले भवनों का आवंटन संशोधन विधेयक और उत्तर प्रदेश मॉल और सेवा कर संशोधन विधेयक शामिल हैं.

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लोक सेवा आयोग की भर्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का रास्ता साफ (फोटोः PTI) लोक सेवा आयोग की भर्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का रास्ता साफ (फोटोः PTI)

नीलांशु शुक्ला

  • लखनऊ,
  • 28 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

  • विधानसभा से पारित हुआ भवन आवंटन संशोधन विधेयक
  • व्यापारियों को मिली 20 लाख की अतिरिक्त कर छूट

उत्तर प्रदेश में लोक सेवा आयोग की ओर से की जाने वाली भर्तियों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है. इससे संबंधित प्रस्ताव शुक्रवार को विधानसभा में पारित हो गया. यूपी विधानसभा में उत्तर प्रदेश लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) विधेयक 2020 पारित हो गया है.

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इस विधेयक के अनुसार आरक्षण का प्रावधान सीटों की संख्या में इजाफा करके किया जाएगा. सरकार की दलील है कि इससे किसी को नुकसान भी नहीं उठाना पड़ेगा और केंद्र सरकार के नियम का पालन भी हो जाएगा. इसके अलावा विधानसभा से दो और प्रस्ताव पारित किए गए. इनमें सूबे के संपत्ति विभाग के नियंत्रण में आने वाले भवनों का आवंटन संशोधन विधेयक और उत्तर प्रदेश मॉल और सेवा कर संशोधन विधेयक शामिल हैं.

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बताया जाता है कि भवन आवंटन संशोधन विधेयक के पारित होने से राज्य संपत्ति विभाग की राजधानी लखनऊ स्थित ओसीआर बिल्डिंग में सरकारी उपक्रमों, निगमों के उपाध्यक्ष, सलाहकार और सदस्यों को आवास आवंटित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है. वहीं, उत्तर प्रदेश मॉल और सेवा कर संशोधन विधेयक के पास होने से व्यापारियों को बड़ा लाभ होगा. व्यापारियों को इससे कर में 20 लाख की अतिरिक्त छूट मिलेगी.

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व्यापारियों को कर पर मिलने वाली छूट का दायरा अब 20 से बढ़कर 40 लाख हो जाएगा. इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सूबे के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कम्पोजिट स्कीम के तहत प्रत्येक तीन माह में रिटर्न भरने की अनिवार्यता समाप्त करने की जानकारी देते हुए कहा कि अब रिटर्न साल में एक बार ही दाखिल करना होगा.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ही विधानसभा में विधायक निधि दो से बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये सालाना करने का प्रस्ताव पेश किया. मुख्यमंत्री ने विधायकों के वेतन, भत्ते और पेंशन पर भी चर्चा को जरूरी बताया और इसके लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का प्रस्ताव पेश किया. बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है.

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