कानपुर के दुर्दांत हिस्ट्रीशीटर विकास के शातिर दिमाग से पुलिस तो बीस साल से शतरंज के मोहरों की तरह उसके इशारों पर नाच ही रही थी, उसकी पत्नी रिचा भी कम होशियार नहीं है. उसका दिमाग तो इतना एक्टिव रहता है कि जब श्मशान घाट पर उसके पति का अंतिम संस्कार हो रहा था उसकी मांग का सिंदूर हमेशा के लिए बदरंग हो चुका था. उस समय भी उसने अपनी दिमागी चाल से दर्जनों टीवी चैनलों और बड़े-बड़े अखबारों के पत्रकारों को मात दे दी.
क्या किया रिचा ने जो पत्रकार बने बेवकूफ?
दरअसल 10 जुलाई को विकास का एनकाउंटर हुआ था. शाम को विकास का शव जब भैरव श्मशान घाट पर पहुंचा तो मीडिया से बचने के लिए रिचा एक घंटे पहले ही अपने छोटे बेटे के साथ श्मशान घाट के अंदर दाखिल हो चुकी थी.
विकास का शव आते ही पुलिस ने मेन गेट बंद करके मीडिया की एंट्री रोक दी, जिससे मीडिया उस तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन मीडिया ने गेट को घेर लिया तब रिचा ने दिमाग का इस्तेमाल किया क्योंकि अंतिम संस्कार में आई सभी महिलाओं ने चेहरे ढंक रखे थे. कोई रिचा को पहचानता नहीं था. रिचा ने इसी का फायदा उठाया अपने साथ की दो-तीन महिलाओं को तैयार करके गेट की तरफ भेज दिया.
महिलाओं को गेट से बाहर आता देखकर पूरी मीडिया उनके पीछे लग गई. रिचा ने महिलाओं को पहले ही समझा रखा था कि मीडिया कितना भी सवाल पूछे कुछ बोलना नहीं है और रिचा श्मशान में अपनी गाड़ी में बैठ गई थी. जैसे ही मीडिया महिलाओं के पीछे लगी और गेट से हटी तो रिचा अपनी गाड़ी में बैठकर चुपचाप साइड से निकल गई. इस प्रकार रिचा मीडिया के सवालों से बच गई.
रिचा ने जाने से पहले मीडिया वालो को धमकाया
इससे पहले जब श्मशान घाट पर रिचा से बात करने की कोशिश की गई तो उसने मीडियाकर्मियों को धमकाया ही नहीं बल्कि मार डालने तक की धमकी दी थी. उसने ये ताना भी दिया था कि तुम लोग पहले मरवाते हो फिर न्यूज चलवाते हो. तुम भी विकास की तरह ऊपर जाओगे.
रंजय सिंह