आईसीएसई बोर्ड की स्कूलों में पढ़ाई जा रही एक किताब में छपी तस्वीर को लेकर बवाल मच गया है. छठीं क्लास की किताब में छपी तस्वीर में मस्जिद को ध्वनि प्रदूषण के सोर्स के तौर पर दिखाया गया है. किताब की यह तस्वीर सोशल मीडिया वायरल हो गई है. लोग प्रकाशक से माफी की मांग के साथ किताब के मौजूदा संस्करण से तस्वीर हटाने की मांग कर रहे हैं.
विज्ञान की इस किताब को सेलिना पब्लिशर्स ने प्रकाशित है, जिसमें एक चैप्टर ध्वनि प्रदूषण के कारणों पर आधारित है.
किताब को वापस लेने की मांग
सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही तस्वीर में ट्रेन, कार, प्लेन और मस्जिद को शोर पैदा करने वाले चिन्हों के साथ दिखाया गया है. इनके बगल में खड़ा एक आदमी अपने हाथों से कानों को बंद किए हुए परेशान दिख रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स ने किताब को वापस लेने की मांग के साथ एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की है.
हालांकि आईसीएसई बोर्ड के अधिकारियों की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन प्रकाशक ने तस्वीर के लिए माफी मांगी है. सोशल साइट पर प्रकाशक हेमंत गुप्ता ने एक पोस्ट में कहा, 'हम सभी को बताना चाहते हैं कि किताब के अगले संस्करणों में इस चित्र को हटा दिया जाएगा.'
प्रकाशक ने मांगी माफी
गुप्ता ने कहा कि किताब के पेज नंबर 202 पर दर्शाए डायग्राम में दिख रही संरचना एक किले और अन्य शोर पैदा करने वाले चीजों की है, जिन्हें एक शोर गुल से भरे शहर में स्थित दिखाया गया है.
उन्होंने कहा कि अगर किसी की भावना को कोई ठेस पहुंची है, तो इसके लिए माफी मांगते हैं.
सोनू निगम ने अजान पर जताई थी आपत्ति
बता दें कि बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम ने इसी साल अप्रैल महीने में अजान को नींद में खलल डालने वाला बताकर विवाद खड़ा कर दिया था. सोनू निगम ने सोशल साइट पर लिखे पोस्ट में कहा था कि मुझे हर सुबह अजान की आवाज के साथ जगना पड़ता है. मस्जिदों में प्रार्थना के लिए अजान होती है, जिसके लिए लाउडस्पीकरों का उपयोग किया जाता है.
परफेक्ट बॉडी शेप बताने पर विवाद
स्कूली किताबों में विवादित कंटेंट को लेकर हाल के महीनों में बहुत सारे मामले सामने आए हैं. सीबीएसई की 12वीं क्लास की फिजिकल एजुकेशन कि किताब में 36-24-36 मानक की शारीरिक बनावट को महिलाओं के लिए बेस्ट बॉडी शेप बताया गया था, जिसे लेकर खासा विवाद हुआ.
बिल्ली के बच्चे पर विवाद
इसी तरह इस साल की शुरुआत में कक्षा 4 की पर्यावरण विज्ञान की किताब में बिल्ली के बच्चे को मारे जाने को प्रयोग के रूप में दिखाया गया था, जोकि सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. विवाद के बाद प्रकाशक को मार्केट से किताब वापस लेनी पड़ी.
नंदलाल शर्मा