आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने से खफा राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू एक दिन की भूख हड़ताल करेंगे. 20 अप्रैल को अपने जन्म दिन के मौके पर वह अमरावती में एक दिन का उपवास रखेंगे. नायडू की यह रणनीति दरअसल उस सियासी मुहिम की शुरुआत मानी जा रही है जिस पर मोदी सरकार के खिलाफ तीसरे मोर्चे को एकजुट किया जाना है.
बकौल नायडू, ‘हमारी मांग है कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिले. साथ ही आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत मिलने वाली उन सहुलियतों को हासिल करना है जिसका आश्वासन सरकार की तरफ से राज्य सभा में दिया गया था, लेकिन अभी तक मिला नहीं है.’
गौरतलब है कि चंद्र बाबू नायडू भूख हड़ताल अपने जन्म दिन के मौके 20 अप्रैल को कर रहे हैं. तेलगुदेशम पार्टी से मिली जानकारी के मुताबिक जन्म दिन पर विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तथा अगल-अलग दलों के नेता फोन कर शुभकामना देते हैं.
इस दिन शुभकामना देने वालों से सीएम आग्रह करेंगे कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा मिले इसके लिए समर्थन दें. आंध्र प्रदेश के अलावा बिहार भी लंबे समय से विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहा है. साथ ही ओडिशा समेत कई अन्य राज्य भी इस तरह की मांग कर रहे हैं. लिहाजा इन राज्यों से नायडू को समर्थन मिलने की उम्मीद है.
सूत्रों का कहना है कि, दरअसल नायडू इस मौके को तीसरे मोर्चे के गठन का अवसर भी बनाना चाहते हैं. जो भी दल नायडू के इस उपवास को समर्थन देंगे उनमें इक्के-दुक्के को छोड़कर शेष दल तीसरे मोर्चे की छतरी तले आ सकते हैं.
विदित हो कि तेलंगाना के सीएम पहली ही तीसरे मोर्चे की पहल कर चुके हैं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनका समर्थन किया. अब यदि ममता नायडू के पक्ष में आती हैं तो तीसरे मोर्चे की ओर बढ़ने का रास्ता आसान हो सकता है.
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संध्या द्विवेदी / मंजीत ठाकुर