सरकारी बाबू अब नही दिखेगा फाईलों से घिरा हुआ

सरकारी दफ्तर की बात करते ही दिमाग में फाइलों के ढेर और काम की सुस्त चाल की छवि बन जाती है. लेकिन अब यह छवि बस कुछ ही दिनों की है. जल्द ही सरकारी बाबू भी लैपटॉप और टैब लिए काम करते दिखेंगे. नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कैंपेन के तहत एक दशक पुराने सरकारी नियम को बदल दिया गया है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2014,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

सरकारी दफ्तर की बात करते ही दिमाग में फाइलों के ढेर और काम की सुस्त चाल की छवि बन जाती है. लेकिन अब यह छवि बस कुछ ही दिनों की है. जल्द ही सरकारी बाबू भी लैपटॉप और टैब लिए काम करते दिखेंगे. नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कैंपेन के तहत एक दशक पुराने सरकारी नियम को बदल दिया गया है. सरकारी दफ्तरों का समय बढ़ाने की चर्चा के बीच सरकार के इस फैसले के बाद हो सकता है सरकारी बाबू घर बैठे भी काम करते नजर आ जाएं.

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शुक्रवार को वित्त मंत्रालय ने इस संबध में एक नई नियमावली जारी की. गौरतलब है कि पहले सरकारी कर्मचारियों के लिए गैजेट खरीदना बहुत मुश्किल था. नई नियमावली के तहत उपसचिव और उससे वरिष्ठ अधिकारी 70 हजार तक के गैजेट्स खरीद सकेंगे. कर्मचारी को गैजेट मिलेगा या नही इसका निर्णय हर विभाग का प्रमुख करेगा.

चार साल तक गैजेट का इस्तेमाल करने के बाद कुल कीमत का सिर्फ 10 फीसदी चुका कर कर्मचारी गैजेट सरकार से अपने लिए खरीद भी सकता है. एक सरकारी अधिकारी के अनुसार आज के दौर में यह फैसला सरकारी सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है.

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