कश्मीर में अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. 89 साल के गिलानी ने अपना उत्तराधिकारी 78 साल के मोहम्मद अशरफ शेहराई को बनाया है. सूत्रों के मुताबिक गिलानी ने ये फैसला लगातार गिरती अपनी सेहत के चलते लिया है.
कौन हैं मोहम्मद अशरफ शेहाराई
मोहम्मद अशरफ शेहराई तहरीक-ए-हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पुराने नेता हैं. उन्हें गिलानी के बेहद करीबी नेताओं में माना जाता है. अशरफ को पार्टी के एडवाइजरी बोर्ड (मजलिस ए शोरा) में लिए गए फैसले के बाद चुना गया है. अशरफ शेहराई उत्तरी कश्मीर के लोलाब इलाके के टिक्कीपोरा के रहने वाले हैं. शेहराई भी गिलानी की तरह ही हार्डलाइनर माने जाते हैं.
गिलानी करते हैं अलगाववाद की राजनीति
सैयद अली शाह गिलानी बीते दो दशकों से कश्मीर में अलगाववाद की आग धधका रहे हैं. कश्मीर में जब-तब बंद की कॉल देने वाले गिलानी राज्य को अलगाववाद की आग में झोंक रहे हैं. घाटी के युवाओं को सेना के खिलाफ बरगला कर उन्हें पत्थरबाजी के लिए उकसाने के आरोप उन पर लगते रहे हैं.
गिलानी के दो बेटे नईम और नसीम खान टेरर फंडिंग केस में एनआईए के रडार पर हैं. दोनों ही सरकारी कर्मचारी हैं. नईम एक सर्जन है जबकि नसीम शिक्षाविद है. एक समय गिलानी के दामाद अल्ताफ फंटूश को गिलानी के उत्तराधिकारी के रूप में माना जा रहा था. लेकिन गिलानी ने अपने करीबी और भरोसेमंद साथी अशरफ पर विश्वास जताते हुए पार्टी की बागडोर उन्हें सौंप दी. गिलानी ने 2001 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की स्थापना की थी. तभी से वह इसके अध्यक्ष पद पर बने हुए थे.
बता दें कि 'आज तक' ने ऑपरेशन हुर्रियत के जरिए कश्मीर में आतंकी फंडिंग को बेनकाब किया था. इसके बाद आतंकी फंडिंग के आरोप में कई अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने करीब 20 दिनों तक अलगाववादी नेताओं से पूछताछ की थी. बताया जा रहा है कि पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जिसको लेकर NIA की जांच जारी है.
एनआईए की नजर अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की संपत्ति को अपने कब्जे में लेने की है. NIA ने गिलानी को 14 प्रॉपर्टी को शॉर्ट लिस्ट किया है, इसमें गिलानी के परिवार के सदस्यों की संपत्ति भी शामिल है. कहा जा रहा है कि इसमें गिलानी की 100 करोड़ से लगभग 150 करोड़ रुपए तक की संपत्ति जब्त हो सकती है.
कमलजीत संधू / राहुल विश्वकर्मा