व्यंग्य: चुनाव नतीजों के बाद सेकुलरदास की व्यथा-कथा

जम्मू-कश्मीर चुनाव परिणामों के बाद बंदानवाज दाढ़ीदराज़ सेकुलरदास पर फिर उदासी तारी हो गई. पूरे दिन घर से नहीं निकले. किसी का फोन भी नहीं उठाया.

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डॉ. चंद्रकांत प्रसाद सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 25 दिसंबर 2014,
  • अपडेटेड 4:19 PM IST

जम्मू-कश्मीर चुनाव परिणामों के बाद बंदानवाज दाढ़ीदराज़ सेकुलरदास पर फिर उदासी तारी हो गई. पूरे दिन घर से नहीं निकले. किसी का फोन भी नहीं उठाया. उनकी पत्नी ने बताया कि चुनाव परिणाम के दिन उन्होंने सिर्फ नाश्ता किया था, वह भी परिणामों के ट्रेंड आने के पहले.

मैं बिना बताए उनसे मिलने पहुंच गया. वे गुमसुम बैठे थे. मैंने कहा, आपके साथ चाय पीने आया हूं. इस पर वे थोड़ा मुस्कराये और बोले, 'तुम चाय पीते नहीं फिर भी बहाना चाय है! खैर, आए हो तो सुनो-कश्मीर की अवाम ने तो भाजपा को ठेंगा दिखा ही दिया है. 1 प्रतिशत वोट के साथ अच्छे दिन कैसे आएंगे? एक भी सीट घाटी में नहीं मिली. एक को छोड़ सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. मतलब कम्युनल भाजपा को सेकुलर कश्मीर ने नकार दिया.

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यह सब कहते सेकुलरदास ने हल्की विजय मुस्कान बिखेरी. मैंने हंसी रोकते हुए कहा- 'पर पूरे राज्य का नाम तो जम्मू-कश्मीर है जिसमें लद्दाख भी है. फिर एक हिस्से कश्मीर पर इतना जोर क्यों?' सेकुलरदास थोड़ा असहज हो गए, 'सो तो ठीक है लेकिन चर्चा तो हमेशा कश्मीर की ही होती है और जो वहां होता है वही पूरे राज्य के लिए सही माना जाता है.'

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मैंने टोका, 'लेकिन इस बार तो पूरे राज्य में भाजपा को सर्वाधिक 23 फीसदी मत मिले. 25 सीटों के साथ वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. पीडीपी को उससे सिर्फ तीन अधिक सीटें हैं. फिर पहली बार वह घाटी में चुनाव लड़ी. हो सकता है इस बार उसकी सरकार भी बने.'

यह सुनते ही वे बिफर गए, 'यह हो ही नहीं सकता. पीडीपी, कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेस कभी ऐसा नहीं होने देंगे. यह तो सेकुलर एकता का सवाल है.'

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इस बीच उनकी पत्नी बोल पड़ी, 'पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेस दोनों में किसी को भी सत्ता के लिए भाजपा से हाथ मिलाने में गुरेज नहीं है. किसी को बहुमत नहीं है, ऐसे में और कोई चारा भी नहीं है. और तुम लोग ये सेकुलर-कम्युनल क्या करते रहते हो? मुसलमान या हिंदू के हर गलत काम को सही ठहरा कर बाकी लोगों को उनके खिलाफ करते हो और समाज में अमन के नाम पर विद्वेष फैलाते हो. कुछ न मिले तो कश्मीर को सेकुलर और जम्मू-कश्मीर राज्य का पर्याय बनाकर जम्मू से ज्यादा सीटें जीतनेवाली पार्टी को कम्युनल घोषित कर डालो.'

समर्थन मिलता देख मैं भी शुरू हो गया, 'भाई साहब, कश्मीर भारत का एक मात्र मुसलमान बहुल क्षेत्र है और वहां से लाखों हिन्दुओं को भगा दिया गया जिन्हें जम्मू में शरण मिली. कश्मीरी हिन्दू शरणार्थियों के कारण जम्मू कम्युनल हो गया फिर वहां से ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी कैसे कम्युनल नहीं होगी? दूसरे, सेकुलर कश्मीर में उसे अंडा मिला, उसे सर्वाधिक मत प्रतिशत मिलना कोई मायने नहीं रखता क्योंकि उसमें हिन्दू वोट ज्यादा है जो सिद्धांततः कम्युनल है. तब तो पूरा हिन्दुस्तान कम्युनल हो गया.'

इस बीच सेकुलरदास की पत्नी ने उनकी तरफ चाय का प्याला और मठरी बढ़ाते हुए चुटकी ली, 'बिल्कुल ठीक कहा. हिन्दुस्तान कम्युनल और पाकिस्तान सेकुलर!'

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(डॉ. चंद्रकांत प्रसाद सिंह के ब्लॉग U & ME से साभार)

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