उत्तर कोरियाई तट के निकट पहुंचा अमेरिकी युद्धपोत

कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अपना एक युद्धपोत और समुद्र आधारित रेडार प्रणाली समेत प्रमुख सैन्य हर्बे-हथियार उत्तर कोरिया तट के नजदीक ले जा रहा है.

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aajtak.in

  • मास्को/वाशिंगटन,
  • 02 अप्रैल 2013,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अपना एक युद्धपोत और समुद्र आधारित रेडार प्रणाली समेत प्रमुख सैन्य हर्बे-हथियार उत्तर कोरिया तट के नजदीक ले जा रहा है.

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विध्वंसक पोत यूएसएस जॉन
एस. मैककैन और एसबीएक्स-1 से उस इलाके में नौसैनिक तैनाती की शुरुआत हो सकती है.

पेंटागन के प्रेस सचिव जार्ज लिटल ने सीएनएन को बताया, ‘मैं सभी से आग्रह करूंगा कि वह इस
पोत की तैनाती को दक्षिण कोरिया में हाल के सैन्य अभ्यासों से अलग रखें. एशिया प्रशांत क्षेत्र में हमारे पोतों की नियमित आवाजाही है और हम अपने पोतों की आवाजाही का उपयोग ढेर सारे उद्देश्यों से करते हैं.’

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लिटल ने कहा, ‘सो, मैं कोरियाई प्रायद्वीप के हाल के तनावों के साथ साथ इसे जोड़ने पर बेहद सतर्क रहूंगा.’ अमेरिका की तरफ से कदम दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास के बाद उठाया गया है. सैन्य अ5यास में परमाणु क्षमता वाले बी-2 स्टील्थ बमवर्षक और बी-52 तथा एफ-22 रैप्टर स्टील्थ विमानों का उपयोग किया गया था.

पेंटागन के प्रेस सचिव ने कहा, ‘हम किसी गलत आकलन के प्रति चिंतित हैं. गलत आकलन और जोखिम से बचना स्पष्ट रूप से हमारा लक्ष्य है. हम प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता का रास्ता चुनना चाहते हैं. उत्तर कोरियाई हाल के दिनों में कथनी और करनी दोनों में उकसावेबाजियों की श्रृंखला से जुड़े रहे.’ लिटल ने कहा, ‘उनके लिए वक्त आ गया है कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का वहन करें और शांति की राह चुनें.’ उन्होंने कहा कि अमेरिका ने उत्तर कोरियाई पक्ष की तरफ ऐसी किसी तरह की सैन्य गतिविधियां नहीं देखी है जो किसी तत्काल सैन्य कार्रवाई इंगित करती हो.

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अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ‘सो, हम समझते हैं कि कोरियाई प्रायद्वीप में चीजें कुछ आसान होंगी.
कम से कम हो ऐसी उम्मीद करते हैं। स्वाभाविक रूप से हम किसी आपात स्थिति के लिए तैयार हैं.’ इस बीच, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री यून ब्यूंग-से आज यहां अमेरिकी विदेश मंत्री से मिलने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि इस मुलाकात में क्षेत्र में खतरे और सुरक्षा हालात पर चर्चा होगी.’

उत्तर कोरिया ने हाल ही में धमकी दी थी कि कोई उकसावेबाजी ‘पूर्णरूपेण जंग में, किसी परमाणु जंग’ में तब्दील हो सकती है और इसमें हवाई तथा गुआम के अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जाएगा. उत्तर कोरिया ने पिछले ही हफ्ते कहा था कि वह दक्षिण कोरिया के साथ ‘युद्ध की स्थिति में प्रवेश’ कर गया है.

लिटल ने कहा, ‘दक्षिण कोरियाई सहयोगी के साथ हमारी हाल की गतिविधियां गठबंधन सहयोग के
बारे में थी, उन्हें यकीन दिलाने के लिए थी कि हम वहां उनकी रक्षा करने के लिए हैं.’ उन्होंने बताया कि कोरियाई प्रायद्वीप में 28,500 अमेरिकी सैनिक हैं और क्षेत्र में जापान जैसे हमारे अन्य मित्र भी हैं और यह सुरक्षा के बारे में है जिसपर हम सर्वाधिक चिंतित हैं.’

इससे पहले लिटल ने पत्रकारों से कहा था कि जापान के कादेना वायु ठिकाने से दो एफ-22 रैप्टर्स दक्षिण कोरिया के ओसान वायु ठिकाने पर तैनात किए गए हैं. उनका कहना था कि यह तैनाती पूर्वनियोजित है और ये रैप्टर्स फोअल ईगल सैन्य अ5यास में हिस्सा लेने वहां गए हैं. एक मार्च से शुरू हुआ यह सैन्य अभ्यास दो महीने तक चलेगा.

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दक्षिण कोरिया करेगा कठोर जवाबी कार्रवाई

दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के जवाब में दो टूक कहा है कि यदि उसके खिलाफ किसी तरह की आक्रामक कार्रवाई की जाती है तो वह कठोर जवाबी कार्रवाई करेगा.

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया की ओर से किसी तरह के परमाणु हमले या मिसाइल हमले की सूचना मिलने पर उनका देश इसे रोकने के लिए पहले हमला कर सकता है और इसके लिए योजना बना ली गई है.

इसकी घोषणा रक्षा मंत्री किम क्वान जिन ने कोरियाई द्वीप में बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति पार्क ग्यून हाई को वार्षिक रक्षा नीति की जानकारी देने के दौरान की.

रक्षा मंत्री ने कहा कि दक्षिण कोरिया की सेना ने उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल हमले को रोकने के लिए त्वरित हमले की योजना बनाई है. साथ ही सैन्य निगरानी एवं सर्वेक्षण की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी.

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने अपनी सीमा से सटे क्षेत्र में दक्षिण कोरिया एवं अमेरिका के सैन्याभ्यास के बाद सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी. इससे पहले उत्तर कोरिया ने 12 फरवरी को परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद कोरियाई द्वीप में तनाव बढ़ गया था.

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